नयी दिल्ली, 26 सितंबर (भाषा) दिल्ली की एमएसएमई संयुक्त सचिव मर्सी एपओ ने शनिवार को कहा कि नई प्रौद्योगिकी को अपनाने से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उपक्रमों (एमएसएमई) को उत्पादकता बढ़ाने, कार्यक्षमता में सुधार करने, मुश्किल हालात का सामना करने और नई क्षमताएं विकसित करने के बड़े मौके मिलते हैं।
एपओ ने भारतीय लागत लेखा संस्थान (आईसीएमएआई) की उत्तर भारतीय क्षेत्रीय परिषद (एनआईआरसी) द्वारा आयोजित दिल्ली एमएसएमई सम्मेलन में ये बातें कहीं।
आईसीएमएआई दुनिया की सबसे बड़ी लागत एवं प्रबंधन लेखा संस्था है, जिसके दुनिया भर में छह लाख से ज्यादा छात्र और एक लाख प्रशिक्षित पेशेवर हैं।
एपओ ने कहा, ‘‘नई प्रौद्योगिकी को अपनाने से एमएसएमई को उत्पादकता बढ़ाने, कार्यक्षमता में सुधार करने, मुश्किल हालात का सामना करने और नई क्षमताएं विकसित करने के बड़े मौके मिलते हैं। ’’
उन्होंने आगे कहा, ‘‘ये कुछ ऐसी विशेषताएं हैं, जिन्हें हम एमएसएमई विकास कानून, 2026 में जोड़ रहे हैं, जिसे पिछले महीने संसद ने पारित किया था। ‘विकसित भारत’ के नजरिये के अनुरूप हम अपने एमएसएमई के लिए क्षमता विकसित करने की कोशिश कर रहे हैं। आईसीएमएआई ज्ञान और पेशेवर सहायता के साथ एमएसएमई तक पहुंच रहा है।’’
एनआईआरसी के चेयरमैन मनीष कांडपाल ने कहा कि यह सम्मेलन सिर्फ एक अलग कार्यक्रम नहीं है, बल्कि देश भर में एमएसएमई को सशक्त बनाने की लगातार कोशिशों में एक अहम कड़ी है।
भाषा राजेश राजेश पाण्डेय
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