भुवनेश्वर, 26 सितंबर (भाषा) वेदांता रिसोर्सेज के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने शनिवार को कहा कि औद्योगिक परियोजनाओं का विरोध होना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है और अमेरिका तथा ऑस्ट्रेलिया जैसे विकसित देशों की तरह भारत को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए जमीन के नीचे मौजूद अपने खनिज संसाधनों का पूरा दोहन करने की जरूरत है।
अग्रवाल के वेदांता समूह ने ओडिशा में पहले ही एक लाख करोड़ रुपये का निवेश किया हुआ है और वह रायगडा में एक अन्य रिफाइनरी तथा ढेंकनाल जिले में स्मेल्टर संयंत्र स्थापित करने के लिए इतनी ही अतिरिक्त राशि का निवेश करने को तैयार है। उन्होंने यह बात यहां मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी से मुलाकात के बाद कही।
उन्होंने राज्य के पश्चिमी हिस्से में 1,000 बेड वाला एक अस्पताल स्थापित करने का भी प्रस्ताव रखा। कंपनी की कालाहांडी जिले के लांजीगढ़ में रिफाइनरी है, जबकि झारसुगुड़ा जिले में एक स्मेल्टर और बिजली संयंत्र है, जो राज्य के पश्चिमी क्षेत्र में आता है।
रायगडा जिले के सिजीमाली में बॉक्साइट खनन को लेकर स्थानीय लोगों के विरोध का सामना करने से जुड़े सवाल पर अग्रवाल ने कहा, ”विरोध स्वाभाविक है। लोग विरोध करेंगे, लेकिन हमें एक विकसित ओडिशा और विकसित भारत के निर्माण के लिए सभी को साथ लेकर आगे बढ़ना होगा। दो दशक पहले कुछ विदेशी तत्व हमारे सीधे-सादे लोगों को परियोजनाओं का विरोध करने के लिए भड़काते थे। अब स्थितियां सामान्य हैं और कोई विरोध नहीं है।”
उन्होंने कहा, ”हमें जमीन के नीचे दबे संसाधनों की खोज करनी चाहिए और ‘आयात पर निर्भर देश’ का ठप्पा हटाना चाहिए। हमारे पास अपने संसाधन हैं और उनका दोहन करने की जरूरत है। अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश जमीन के नीचे मौजूद संपदा का उपयोग करके ही विकसित बने हैं।”
मुख्यमंत्री माझी ने अग्रवाल से मुलाकात के बाद एक बयान में कहा, ”वेदांता की एक लाख करोड़ रुपये की प्रस्तावित एल्युमीनियम परियोजनाओं से दो लाख से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे। परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाई जाएगी, जिससे ओडिशा को विश्वस्तरीय एल्युमीनियम उत्पादन केंद्र के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी।”
भाषा पाण्डेय
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