भोपाल, 30 जनवरी (भाषा) राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने शुक्रवार को यहां ‘राज्य केंद्रित दस्तावेज’ प्रस्तुत किया, जिसमें वित्त वर्ष 2026-27 के लिए मध्यप्रदेश की कुल प्राथमिकता क्षेत्र ऋण क्षमता 3,75,384.29 करोड़ रुपये होने का अनुमान लगाया गया है।
यहां आयोजित राज्य ऋण संगोष्ठी के दौरान प्रस्तुत किए गए दस्तावेज में इस बात पर प्रकाश डाला गया कि मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था में कृषि का दबदबा बना हुआ है, जो राज्य के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) में 44.36 प्रतिशत का योगदान देती है।
इस दस्तावेज में राज्य की कृषि, एमएसएमई और ग्रामीण विकास की जरूरतों का व्यापक मूल्यांकन किया गया है।
एक अधिकारी ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 3,75,384.29 करोड़ रुपये के कुल अनुमान में से 2,08,743.78 करोड़ रुपये कृषि क्षेत्र के लिए निर्धारित किए गए हैं, जिसमें कृषि ऋण, कृषि बुनियादी ढांचा और सहायक गतिविधियां शामिल हैं, जबकि एमएसएमई क्षेत्र के लिए 1,46,269.36 करोड़ रुपये का आकलन किया गया है।
उन्होंने कहा कि शेष 20,371.15 करोड़ रुपये निर्यात ऋण, शिक्षा, आवास, सामाजिक बुनियादी ढांचे, नवीकरणीय ऊर्जा और अन्य प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को कवर करते हैं।
अधिकारी ने कहा कि रिपोर्ट में कृषि ऋण क्षमता के रूप में 1,79,589.97 करोड़ रुपये, कृषि बुनियादी ढांचे के लिए 6,461.67 करोड़ रुपये और सहायक गतिविधियों के लिए 22,692.14 करोड़ रुपये का अनुमान लगाया गया है।
मध्यप्रदेश गेहूं, चावल, सोयाबीन, चना, दलहन और तिलहन के भारत के अग्रणी उत्पादकों में से एक बना हुआ है, जो फसल उत्पादन, कृषि मशीनीकरण, सिंचाई और मूल्य श्रृंखला विकास का समर्थन करने के लिए संस्थागत ऋण की निरंतर मांग का संकेत देता है।
सेमिनार में राज्य के मंत्री विश्वास सारंग, ऐदल सिंह कंसाना, नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक सी सरस्वती के साथ वरिष्ठ बैंकरों और सरकारी विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया।
भाषा
ब्रजेन्द्र रवि कांत अजय
अजय