जयपुर, 13 जुलाई (भाषा) राजस्थान के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने सोमवार को कहा कि राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ग्रामीण बुनियादी ढांचे के विकास में एक महत्वपूर्ण भागीदार के रूप में उभरा है और वर्ष 2047 तक विकसित राजस्थान के लक्ष्य को हासिल करने में उसकी भूमिका आगे भी अहम रहेगी।
जयपुर में नाबार्ड के स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए श्रीनिवास ने कहा कि संस्थान ने राज्य के ग्रामीण और कृषि विकास में उल्लेखनीय योगदान दिया है।
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र द्वारा वर्ष 2026 को ‘अंतरराष्ट्रीय महिला किसान वर्ष’ घोषित किए जाने का उल्लेख करते हुए महिला सशक्तीकरण को मजबूत बनाने और समावेशी ग्रामीण वित्तीय प्रणाली विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
नाबार्ड के उप प्रबंध निदेशक राकेश कश्यप ने कहा कि बैंक की रणनीतिक प्राथमिकताएं केंद्र सरकार के ग्रामीण विकास के दृष्टिकोण के अनुरूप हैं।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण आधारभूत ढांचे को सुदृढ़ बनाने में नाबार्ड राजस्थान सरकार का एक भरोसेमंद विकास साझेदार रहा है।
कश्यप ने कहा कि नाबार्ड ने किसान क्रेडिट कार्ड, किसान क्लब और किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) जैसी पहल के माध्यम से लघु एवं सीमांत किसानों को सहयोग दिया है।
उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूह-बैंक लिंकेज कार्यक्रम ने ग्रामीण महिलाओं की वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने में किसानों की सहायता के लिए नाबार्ड के प्रयासों का भी उल्लेख किया।
कार्यक्रम के दौरान नाबार्ड ने ‘राजस्थान में नाबार्ड – उपलब्धियां 2025-26’ तथा ‘ट्रांसफॉर्मिंग रूरल राजस्थान’ (ग्रामीण राजस्थान के परिवर्तन की सफलता की कहानियों का संकलन) नामक दो प्रकाशनों का विमोचन किया।
बैंक ने ग्रामीण विकास में उल्लेखनीय योगदान देने वाले उत्कृष्ट किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी), प्राथमिक कृषि साख समितियों (पैक्स) और कारीगरों को सम्मानित किया। बयान के अनुसार, जलवायु अनुकूल कृषि को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जीवा परियोजना के दो प्रस्तावों के लिए अनुदान स्वीकृति पत्र भी वितरित किए गए।
भाषा बाकोलिया
रवि कांत अजय
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