नयी दिल्ली, 26 अगस्त (भाषा) कांग्रेस ने पूर्व प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) जनरल (सेवानिवृत्त) अनिल चौहान के एक बयान को लेकर बुधवार को कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बारे में समय-समय पर किए जा रहे ‘‘सुर्खियां बटोरने वाले खुलासे’’ उस व्यापक समीक्षा का विकल्प नहीं हो सकते, जैसी समीक्षा कारगिल युद्ध के बाद के. सुब्रह्मण्यम की अध्यक्षता वाली समिति ने की थी।
जनरल (सेवानिवृत्त) चौहान ने मंगलवार को कहा था कि भारतीय सेनाओं ने पाकिस्तान की किराना हिल्स को ‘‘निशाना नहीं बनाया’’, जहां कथित तौर पर एक परमाणु प्रतिष्ठान है बल्कि सरगोधा की ओर कई आत्मघाती ड्रोन भेजे गए थे और इनमें से एक अपनी उड़ान क्षमता खोने के बाद नीचे गिरकर किसी पहाड़ी से टकरा गया होगा।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि 30 मई 2025 को सिंगापुर में दिए गए एक साक्षात्कार में तत्कालीन सीडीएस चौहान ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बारे में ‘‘कुछ बेहद महत्वपूर्ण खुलासे’’ किए थे।
रमेश के मुताबिक, जनरल चौहान ने मंगलवार को फिर से कुछ ‘‘बहुत महत्वपूर्ण खुलासे’’ किए हैं, जिन्होंने स्वाभाविक रूप से चिंता पैदा की है।
उन्होंने कहा कि कारगिल युद्ध समाप्त होने के चार दिन बाद 29 जुलाई 1999 को तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली सरकार ने मौजूदा विदेश मंत्री एस जयशंकर के पिता के. सुब्रह्मण्यम की अध्यक्षता में कारगिल समीक्षा समिति का गठन किया था।
कांग्रेस नेता ने कहा कि समिति की रिपोर्ट 23 फरवरी 2000 को संसद में पेश की गई थी।
रमेश ने कहा, ‘‘समय-समय पर साक्षात्कारों और व्याख्यानों में किए जा रहे सुर्खियां बटोरने वाले खुलासे, चाहे वे किसी सुनियोजित रणनीति का हिस्सा हों या नहीं, सुब्रह्मण्यम समिति द्वारा की गई व्यापक समीक्षा प्रक्रिया का कोई विकल्प नहीं हैं।’’
उन्होंने कहा कि ऐसी व्यापक समीक्षा के जरिए ही किसी अभियान या घटना से जुड़े तथ्यों, लिए गए फैसलों और उनसे मिले सबक का व्यवस्थित आकलन किया जा सकता है।
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