नयी दिल्ली, 15 मार्च (भाषा) संसद की एक समिति ने आयकर विभाग से उच्च न्यायालयों या उच्चतम न्यायालय में अपील दायर करने से पहले कर विवाद के मामलों की जांच के लिए एक विशेषज्ञ मुकदमा समिति गठित करने को कहा है। समिति ने मुकदमेबाजी के प्रति विभाग के दृष्टिकोण में व्यापक बदलाव का आह्वान भी किया है।
वित्त मामलों की स्थायी समिति ने 2024-25 में उच्च न्यायालय के स्तर पर आयकर विभाग की सफलता दर महज 12.07 प्रतिशत और आईटीएटी स्तर पर 14.50 प्रतिशत रहने पर चिंता जताई है।
भाजपा सांसद भर्तृहरि महताब की अध्यक्षता वाली समिति ने संसद में पेश अपनी रिपोर्ट में कहा कि बार-बार आने वाले प्रतिकूल परिणाम प्रणालीगत कमजोरियों की ओर इशारा करते हैं।
समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा, ”इसलिए केवल यांत्रिक तरीके से अपील दायर करने के मुद्दे को हल करने की आवश्यकता है… अक्सर व्यक्तिगत जिम्मेदारी या सतर्कता जांच से बचने के लिए ऐसा किया जाता है।”
आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 तक आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (आईटीएटी) के समक्ष 3.64 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विवादित राशि वाले 23,230 मामले लंबित हैं। इसी तरह, उच्च न्यायालय में 5.65 लाख करोड़ रुपये के 41,321 मामले और उच्चतम न्यायालय में 25,403 करोड़ रुपये की मांग वाले 6,880 मामले लंबित हैं।
कर विभाग ने समिति के समक्ष अपनी प्रस्तुति में कहा था कि वह मुकदमेबाजी को ”राजस्व के हितों की रक्षा के सिद्धांतों को बनाए रखने” के उपाय के रूप में देखता है। हालांकि, समिति ने कहा कि कानूनी रूप से कमजोर अपीलों को जारी रखने से मुकदमेबाजी की बढ़ती लागत के माध्यम से सरकारी खजाने पर बोझ पड़ता है और न्यायिक बुनियादी ढांचे में बाधा आती है। इसके अलावा, करदाताओं को भी वर्षों तक अनावश्यक उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है।
समिति ने सिफारिश की है कि अपील दायर करने का फैसला केवल मौद्रिक सीमा के बजाय मामले की मजबूती और ठोस कानूनी व्याख्या पर आधारित होना चाहिए।
भाषा पाण्डेय अजय
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