नयी दिल्ली, 29 सितंबर (भाषा) नीति आयोग के सदस्य आर बालासुब्रमण्यम ने मंगलवार को मानव और सामाजिक पूंजी तथा स्थानीय आर्थिक समूहों के विकास पर अधिक जोर देने के साथ अलग-अलग क्षेत्रों की योजना के बजाय स्थान विशेष की जरूरतों को ध्यान में रखकर एकीकृत योजना बनाने का आह्वान किया।
बालासुब्रमण्यम ने नीति आयोग द्वारा ‘विकसित पंचायत: लोगों, स्थानों, संसाधनों और अवसरों को जोड़ना’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में यह बात कही।
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, उद्घाटन सत्र में विकसित ग्राम पंचायतों को आगे बढ़ाने के लिए विकेंद्रीकृत शासन, स्थान विशेष के हिसाब से योजना, क्षमता विकास, डिजिटलीकरण और विभिन्न योजनाओं के समन्वय के महत्व का जिक्र किया।
स्थानिक यानी क्षेत्र विशेष की जरूरत के मुताबिक, योजना दृष्टिकोण में ग्रामीण विकास की योजना बनाते समय भौगोलिक, भूमि उपयोग और स्थान संबंधी आंकड़ों को एकीकृत किया जाता है, ताकि अधिकतम दक्षता और समानता के लिए यह तय किया जा सके कि बुनियादी ढांचे और सेवाओं को कहां स्थापित किया जाना चाहिए।
बयान में कहा गया कि विचार-विमर्श चार प्रमुख क्षेत्रों… विकेंद्रीकृत और स्थानिक योजना, जमीनी स्तर पर क्षमता विकास, प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के लिए स्थानिक योजना और ग्राम पंचायत विकास योजना (जीपीडीपी) प्रक्रिया में स्थानिक योजना का एकीकरण…पर केंद्रित था।
विचार-विमर्श में गतिविधियों के स्पष्ट निर्धारण, पर्याप्त वित्तीय संसाधनों, उपयुक्त कर्मचारियों की नियुक्ति, अधिक निर्णय लेने के अधिकार, ग्राम सभा की भागीदारी और संस्थागत जवाबदेही पर भी जोर दिया गया।
कार्यशाला में स्थानीय विकास के लिए क्षेत्रवार दृष्टिकोण से स्थानिक और एकीकृत दृष्टिकोण की ओर बढ़ने की जरूरत बतायी गयी। स्थानीय संसाधनों, बुनियादी ढांचे की कमियों, भूमि उपयोग के स्वरूप और विकास के अवसरों की पहचान के लिए जीआईएस, भू-स्थानिक आंकड़ों, गांवों की मास्टर योजनाओं और डिजिटल मंचों के इस्तेमाल पर चर्चा की गई।
भाषा रमण अजय
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