प्रस्तावित एफसीआरए बदलावों के तहत गैर-सरकारी संगठनों के खातों पर एसबीआई ने मांगी स्पष्टता

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प्रस्तावित एफसीआरए बदलावों के तहत गैर-सरकारी संगठनों के खातों पर एसबीआई ने मांगी स्पष्टता

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  • Publish Date - September 29, 2026 / 08:00 PM IST,
    Updated On - September 29, 2026 / 08:00 PM IST

नयी दिल्ली, 29 सितंबर (भाषा) भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए) में प्रस्तावित संशोधनों के उद्देश्यों का समर्थन किया है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक ने इस बारे में नियमों को स्पष्ट करने के लिए कहा है कि किसी संगठन की विदेश से चंदा पाने की अनुमति खत्म होने पर बैंकों को उसके खातों और जमा राशि का प्रबंधन कैसे करना चाहिए।

विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 की समीक्षा कर रही संसदीय समिति के समक्ष मंगलवार को एसबीआई के चेयरमैन सी एस शेट्टी के नेतृत्व में शीर्ष अधिकारियों के एक दल ने प्रस्तुति दी।

सूत्रों के अनुसार, बैंक ने कहा कि विधेयक ऐसे मामलों में विदेशी अंशदान और संपत्तियों पर सरकारी नियंत्रण का प्रावधान तो करता है, लेकिन विस्तृत बैंकिंग प्रक्रिया को नियमों में तय किए जाने के लिए छोड़ देता है।

बैंक ने इस बात पर स्पष्टता मांगी है कि नियंत्रण सरकार द्वारा नियुक्त प्राधिकारी के पास जाने के बाद खाते में लेनदेन को रोक देना चाहिए या उसका संचालन जारी रहना चाहिए।

इसके अलावा बैंक ने यह भी पूछा कि ऐसे खाते को संचालित करने की अनुमति किसे होगी, क्या आने वाले भुगतान को खाते में जमा किया जा सकेगा और मौजूदा शेष राशि, सावधि जमा (एफडी) तथा ब्याज का क्या किया जाएगा।

विधेयक में प्रस्ताव है कि जब किसी संगठन का पंजीकरण रद्द या समाप्त हो जाता है, तो विदेशी अंशदान और उनसे खरीदी गई संपत्तियां अस्थायी रूप से सरकार द्वारा नामित प्राधिकारी के पास चली जाएंगी। यदि संगठन तय अवधि के भीतर पंजीकरण दोबारा हासिल नहीं कर पाता है, तो ये संपत्तियां स्थायी रूप से प्राधिकारी के पास जा सकती हैं।

भाषा पाण्डेय अजय

अजय