New Labour Laws: ओवरटाइम का खेल बदल गया! क्या अब वीकली ऑफ भी सुरक्षित नहीं? नए लेबर लॉ में छिपा है चौंकाने वाला जवाब!

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New Labour Laws: नए लेबर लॉ के अनुसार बॉस छुट्टी के दिन जबरन काम नहीं करा सकते। कर्मचारियों को वीकली ऑफ का अधिकार है। ओवरटाइम केवल सहमति और तय नियमों के तहत ही मान्य है। नियमों का पालन न होने पर कर्मचारी कानूनी शिकायत कर सकते हैं और अपने अधिकार सुरक्षित रख सकते हैं।

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  • Publish Date - April 28, 2026 / 05:28 PM IST,
    Updated On - April 28, 2026 / 05:41 PM IST

(New Labour Laws/ Image Credit: Pixabay)

HIGHLIGHTS
  • वीकली ऑफ कर्मचारियों का कानूनी अधिकार है
  • बिना सहमति छुट्टी पर काम करवाना गलत
  • ओवरटाइम पर अतिरिक्त वेतन जरूरी

नई दिल्ली: New Labour Laws: वीकेंड और छुट्टियां कर्मचारियों के लिए आराम और निजी जीवन का समय होता है। लेकिन कई बार ऑफिस का काम इन दिनों भी जारी रहता है। प्राइवेट सेक्टर में अक्सर कर्मचारियों को छुट्टी के दिन भी काम करने के लिए कहा जाता है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या बॉस ऐसा कर सकते हैं और कानून इस पर क्या कहता है।

क्या काम के लिए मजबूर किया जा सकता है?

नए लेबर नियमों के अनुसार, किसी भी कर्मचारी को उसकी सहमति के बिना छुट्टी के दिन काम करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। अगर नौकरी के कॉन्ट्रैक्ट या कंपनी की पॉलिसी में ऐसा साफ तौर पर नहीं लिखा है तो यह गलत माना जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार बिना सहमति और बिना मुआवजे के काम कराना कानून का उल्लंघन हो सकता है।

वीकली ऑफ एक कानूनी अधिकार

लेबर एक्सपर्ट्स बताते हैं कि वीकली ऑफ कोई सुविधा नहीं बल्कि कर्मचारियों का अधिकार है। नियमों के अनुसार, हर 6 दिन काम करने के बाद 1 दिन की छुट्टी मिलनी जरूरी है। अगर उस दिन काम कराया जाता है तो कर्मचारी को बदले में छुट्टी या अतिरिक्त वेतन दिया जाना चाहिए।

किन कानूनों से मिलती है सुरक्षा

भारत में कई कानून इस विषय को नियंत्रित करते हैं। Weekly Holidays Act, 1942 के अनुसार सप्ताह में कम से कम एक छुट्टी जरूरी है। Factories Act, 1948 और OSH Code, 2020 के तहत भी हर 7 दिन में एक दिन आराम अनिवार्य है। अगर उस दिन काम कराया जाए तो डबल वेतन या कंपेनसेटरी ऑफ देना जरूरी है।

छुट्टी रद्द करने और ओवरटाइम के नियम

अगर किसी कर्मचारी की पहले से मंजूर छुट्टी रद्द करनी हो तो कंपनी को कम से कम 2 हफ्ते पहले सूचना देनी चाहिए। बिना सूचना के छुट्टी बदलना गलत माना जा सकता है। ओवरटाइम के मामले में भी अतिरिक्त भुगतान या छुट्टी देना जरूरी है।

कर्मचारियों के अधिकार और कंपनी का स्टैंड

कर्मचारियों को छुट्टी के दिन काम पर कंपेनसेटरी ऑफ, अतिरिक्त वेतन और बिना कारण छुट्टी रद्द होने पर आपत्ति दर्ज करने का अधिकार है। वहीं कंपनियां अक्सर कहती हैं कि बिजनेस जरूरत के अनुसार काम जरूरी होता है और कॉन्ट्रैक्ट में इसकी अनुमति होती है। कुल मिलाकर छुट्टी पर काम कराना पूरी तरह गैरकानूनी नहीं है। लेकिन इसके लिए नियम और मुआवजा जरूरी है।

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क्या बॉस छुट्टी के दिन जबरन काम करवा सकते हैं?

नहीं, बिना कर्मचारी की सहमति के छुट्टी के दिन काम करवाना सही नहीं माना जाता।

क्या वीकली ऑफ कर्मचारियों का अधिकार है?

हाँ, हर 6 दिन काम के बाद 1 दिन का वीकली ऑफ कानूनी अधिकार है।

अगर छुट्टी के दिन काम करना पड़े तो क्या मिलेगा?

ऐसे में कर्मचारी को कंपेनसेटरी ऑफ या अतिरिक्त वेतन मिलना चाहिए।

क्या बिना नोटिस छुट्टी रद्द की जा सकती है?

नहीं, आमतौर पर इसके लिए कम से कम 2 हफ्ते का नोटिस जरूरी होता है।