नयी दिल्ली, 28 मई (भाषा) सरकार कोयला गैसीकरण-आधारित यूरिया उत्पादन के लिए एक नई नीति को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में है और यह एक महीने के भीतर तैयार हो जाएगी। एक अधिकारी ने यह जानकारी देते हुए इस बात पर बल दिया कि यह कदम आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देगा और विदेशी मुद्रा की बचत करेगा क्योंकि देश, आयातित प्राकृतिक गैस पर बहुत ज्यादा निर्भर है।
सरकार की कोयला गैसीकरण योजना को बढ़ावा देने के लिए यहां आयोजित रोडशो के दौरान एक अधिकारी ने कहा, ‘‘हम कोयला गैसीकरण-आधारित यूरिया उत्पादन के लिए अपनी नई नीति बनाने की प्रक्रिया में हैं और इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। एक महीने के भीतर हम इसके लिए तैयार हो जाएंगे।’’
उन्होंने कहा, ‘‘चूंकि यह सरकार का सुनिश्चित काम है और हम प्राकृतिक गैस पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं—जिसमें से 25 प्रतिशत विभिन्न देशों से आयात की जाती है—इसलिए आत्मनिर्भरता और सरकारी खजाने के मामले में यह हमारे लिए ज्यादा फायदेमंद होगा।’’
कोयला सचिव विक्रम देव दत्त ने कहा कि रसायन और उर्वरक मंत्रालय कुछ समय से नई यूरिया नीति पर काम कर रहा है। मौजूदा हालात को देखते हुए अब इस काम में तेजी लाई गई है। उन्होंने बताया, ‘‘कोयला मंत्रालय की ओर से सुझाव दिया गया था कि नई यूरिया नीति में ‘कोयला गैसीकरण से यूरिया’ बनाने की प्रक्रिया को भी शामिल किया जाना चाहिए। यह नीति अब बहुत ही उन्नत चरण में है और एक महीने के भीतर पूरी हो जानी चाहिए।’’
कोयला गैसीकरण-आधारित यूरिया उत्पादन प्रक्रिया में कच्चे कोयले और पेट कोक को उच्च तापमान पर ऑक्सीकरण के ज़रिये ‘सिनगैस’ (हाइड्रोजन और कार्बन मोनोऑक्साइड) में बदला जाता है। इस हाइड्रोजन को हवा से मिलने वाली नाइट्रोजन के साथ मिलाकर अमोनिया बनाया जाता है, और फिर इस अमोनिया की कार्बन डाइऑक्साइड के साथ प्रतिक्रिया करवाकर यूरिया तैयार किया जाता है। यह प्रक्रिया यूरिया उत्पादन के लिए कच्चे माल (फीडस्टॉक) के तौर पर प्राकृतिक गैस की जगह कोयले का इस्तेमाल करती है, जिससे आयात पर हमारी निर्भरता कम होती है।
कोयला गैसीकरण के क्षेत्र में काम करने वाली एक घरेलू कंपनी ने पहले सरकार को पत्र लिखकर यह अनुरोध किया था कि कोयला-आधारित यूरिया परियोजनाओं को गैस-आधारित संयंत्रों के बराबर दर्जा दिया जाए। इसमें यूरिया की खरीद की उचित गारंटी देने वाले तंत्र को लागू करना और कोयला गैसीकरण मार्ग के लिए उत्पादन क्षमता का एक निश्चित हिस्सा आरक्षित करना शामिल था।
यह अनुरोध ऐसे समय में सामने आया है जब सरकार यूरिया उत्पादन के लिए कच्चे माल के स्रोतों में विविधता लाने, आयातित प्राकृतिक गैस पर निर्भरता कम करने और स्वच्छ गैसीकरण तकनीकों का इस्तेमाल करके भारत के विशाल घरेलू कोयला भंडारों का सदुपयोग करने के अपने व्यापक प्रयासों को आगे बढ़ा रही है।
सरकार को लिखे एक पत्र में, महाराष्ट्र की एक कंपनी—न्यू एरा क्लीनटेक सॉल्यूशन— ने कहा कि कोयला-आधारित यूरिया परियोजनाओं को गैस-आधारित संयंत्र के बराबर दर्जा दिया जाना चाहिए।
न्यू एरा क्लीनटेक सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड की योजना महाराष्ट्र के चंद्रपुर ज़िले के भद्रावती में 12.7 लाख टन की कोयला गैसीकरण-आधारित यूरिया परियोजना स्थापित करने की है।
भाषा राजेश राजेश अजय
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