स्वर्ण ऋण में उच्च वृद्धि के बावजूद चिंता की कोई बात नहीं: आरबीआई गवर्नर

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स्वर्ण ऋण में उच्च वृद्धि के बावजूद चिंता की कोई बात नहीं: आरबीआई गवर्नर

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  • Publish Date - February 6, 2026 / 07:26 PM IST,
    Updated On - February 6, 2026 / 07:26 PM IST

(तस्वीर के साथ)

मुंबई, छह फरवरी (भाषा) सोने की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव के बीच भारतीय रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को कहा कि वह वित्तीय प्रणाली में कीमती धातु के बदले दिए जाने वाले कर्ज (स्वर्ण ऋण) को लेकर पूरी तरह सहज है और इसे लेकर कोई चिंता नहीं है।

आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने द्विमासिक मौद्रिक नीति की घोषणा के बाद संवाददाताओं से कहा कि केंद्रीय बैंक ने स्वर्ण ऋण सहित कुछ अन्य ऋणों की समीक्षा की है और इस निष्कर्ष पर पहुंचा है।

मल्होत्रा ने कहा, ”स्वर्ण ऋण को लेकर हम बहुत सहज हैं। इस परिसंपत्ति वर्ग को लेकर चिंता का कोई कारण नहीं है।”

नवंबर 2025 तक के दो वर्षों में पूरी वित्तीय प्रणाली में कुल स्वर्ण ऋण बकाया लगभग दोगुना हो गया है, क्योंकि सोने की कीमतों में उछाल ने ऋणदाताओं को अधिक सहज बना दिया।

हालांकि, पिछले कुछ दिनों में इस जिंस की कीमतों में तेज गिरावट ने चिंताएं बढ़ा दी हैं, क्योंकि कर्जदार अपने दायित्वों को निभाने में चूक कर सकते हैं।

मल्होत्रा ने कहा कि स्वर्ण ऋण क्षेत्र में ऋण-मूल्य (एलटीवी) अनुपात, जो सुरक्षा के बदले उधारकर्ताओं को दी जाने वाली राशि को दर्शाता है, पूरे उद्योग में निर्धारित मानदंडों से काफी कम है।

उन्होंने कहा कि 85 प्रतिशत तक की सीमा के मुकाबले, वित्तपोषक एलटीवी अनुपात को बहुत छोटे स्तर पर रख रहे हैं, जिससे ऋण बही संबंधी चिंताओं को दूर करने में मदद मिली है।

गवर्नर मल्होत्रा ने कहा कि स्वर्ण ऋण के साथ सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को दिए जाने वाले ऋण और व्यक्तिगत ऋण की भी समीक्षा की गई है।

उन्होंने कहा, ”सभी श्रेणियां अच्छी संपत्ति गुणवत्ता और कम गिरावट दिखाती हैं, और किसी भी चिंता का कोई कारण नहीं है।”

भाषा पाण्डेय प्रेम

प्रेम