नयी दिल्ली, छह फरवरी (भाषा) वेदांता समूह की कंपनी हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड (एचजेडएल) ने शुक्रवार को कहा कि उसने जवाहरलाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च (जेएनसीएएसआर) के सहयोग से बड़े पैमाने पर नवीकरणीय ऊर्जा भंडारण के लिए ‘जिंक-आयन बैटरी पाउच सेल प्रोटोटाइप’ विकसित किया है।
कंपनी के अनुसार, यह विकास ऊर्जा भंडारण प्रौद्योगिकियों में भारत के स्वदेशी अनुसंधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
बयान में कहा गया कि जस्ता (जिंक) संसाधनों की प्रचुरता, कम लागत और व्यापक उपलब्धता के कारण जिंक-आयन बैटरियां स्थिर ऊर्जा भंडारण के लिए एक मजबूत विकल्प के रूप में उभर रही हैं।
हिंदुस्तान जिंक ने कहा कि हालांकि बैटरी का लंबा जीवन चक्र और उच्च ऊर्जा घनत्व प्राप्त करने के लिए इलेक्ट्रोड और इलेक्ट्रोलाइट सामग्रियों को बेहतर बनाना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है, लेकिन जेएनसीएएसआर के साथ यह साझेदारी कम लागत वाले इलेक्ट्रोलाइट फॉर्मूलेशन और स्थिर जिंक-आयन बैटरी प्रोटोटाइप विकसित करके इस समस्या का समाधान कर रही है। ये प्रोटोटाइप बड़े पैमाने पर उपयोग के लिए उपयुक्त हैं।
ये प्रगति सुरक्षित और कुशलतापूर्वक अक्षय ऊर्जा भंडारण को समर्थन देने के लिए जिंक-आयन बैटरियों की क्षमता को प्रदर्शित करती है।
नतीजों और इस विकास पर टिप्पणी करते हुए हिंदुस्तान जिंक के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) और पूर्णकालिक निदेशक अरुण मिश्रा ने कहा, ‘जवाहरलाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च के साथ हमारी साझेदारी सुरक्षित, लागत प्रभावी और बड़े पैमाने पर ऊर्जा भंडारण समाधान उपलब्ध कराने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जो अक्षय ऊर्जा के बढ़ते एकीकरण में सहायक हो सकते हैं।’
भाषा सुमित पाण्डेय
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