मुंबई, आठ अप्रैल (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक ने बुधवार को कहा कि एचडीएफसी बैंक के निदेशक मंडल की बैठक के ब्योरे और अन्य रिकॉर्ड का पर्यवेक्षी निरीक्षण के तहत अध्ययन किया गया और निजी क्षेत्र के सबसे बड़े बैंक में नैतिकता और संचालन के मामले में कोई कमी नहीं पाई गई।
एचडीएफसी बैंक के चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के अचानक इस्तीफे और उसके बाद बैंक के शेयर की कीमत में आई गिरावट से संबंधित एक सवाल के जवाब में आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा, ‘‘मैं यह दोहराना चाहूंगा कि हमारी निगरानी या उनके रिकॉर्ड की जांच करने के बाद हमें संचालन या नैतिकता से संबंधित कोई महत्वपूर्ण मुद्ददा नहीं मिला। नियमित निगरानी के तहत बोर्ड की बैठकों का ब्योरा भी देखा जाता है। हमें बैठक के ब्योरे की प्रतियां उपलब्ध कराई जाती हैं।’’
उल्लेखनीय है कि चक्रवर्ती के इस्तीफे में नैतिकता और मूल्यों पर असहमति के अलावा कोई विशिष्ट कारण नहीं बताया गया था। बैंक के निदेशक मंडल के सदस्यों ने भी कहा कि वे इस्तीफे के कारण से ‘हैरान’ थे क्योंकि अतनु चक्रवर्ती ने भी अपनी चर्चाओं के दौरान किसी विशेष उदाहरण का उल्लेख नहीं किया था।
उनके इस्तीफे से मौजूदा नियमों की प्रभावशीलता पर सवाल उठे। उनके इस्तीफे के बाद बैंक के शेयर में भारी गिरावट आई थी। आरबीआई के वरिष्ठ अधिकारियों ने बुधवार को कहा कि समीक्षा की कोई आवश्यकता नहीं है।
गवर्नर ने कहा, ‘‘दिशानिर्देशों या निर्देशों में बदलाव की आवश्यकता के संबंध में, फिलहाल हमें ऐसी कोई आवश्यकता महसूस नहीं होती। हालांकि, यदि भविष्य में किसी बदलाव या नए नियम की आवश्यकता महसूस होती है और आप जानते हैं कि सेबी के पास इस संबंध में पहले से ही निर्देश हैं, तो आवश्यकता पड़ने पर हम अतिरिक्त निर्देश जारी करने में संकोच नहीं करेंगे।’’
डिप्टी गवर्नर स्वामीनाथन जे ने कहा कि केंद्रीय बैंक नियमों में बदलाव करने के लिए तैयार है, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें इसमें कोई लाभ नहीं दिखता।
उन्होंने कहा, ‘‘इस समय, ऐसा कोई मामला नहीं है जिससे व्यापक सूझबूझ वाले उपाय या नियामक संशोधन की जरूरत है।’’
आईडीएफसी बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक जैसे वित्तीय संस्थानों के साथ राज्य सरकार के खातों के संदर्भ में सामने आ रही धोखाधड़ी के मामलों पर टिप्पणी करते हुए, मल्होत्रा ने कहा कि यह साठगांठ करने वाले व्यक्तियों के एक समूह द्वारा किया गया आपराधिक गतविधियां है। उन्होंने कहा कि ऐसी गतिविधि को रोकने के लिए किसी भी नियम में बदलाव की आवश्यकता नहीं है।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं सभी को आश्वस्त करना चाहता हूं कि बैंकिंग प्रणाली सुरक्षित और मजबूत है।’’
स्वामीनाथन ने कहा कि ये संस्था-विशिष्ट घटनाक्रम हैं और इस समय किसी भी प्रकार का प्रणालीगत जोखिम नहीं है।
भाषा रमण पाण्डेय
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