शेयर बाजार के समापन नीलामी सत्र में नहीं मिली कोई हेराफेरीः सेबी चेयरमैन
शेयर बाजार के समापन नीलामी सत्र में नहीं मिली कोई हेराफेरीः सेबी चेयरमैन
मुंबई, 12 अगस्त (भाषा) बाजार नियामक सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने बुधवार को कहा कि हाल में शुरू किए गए समापन नीलामी सत्र (सीएएस) में नियामक को अब तक किसी तरह की हेराफेरी देखने को नहीं मिली है।
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के प्रमुख ने यहां एक कार्यक्रम से इतर व्यापक बाजार प्रणाली से नई व्यवस्था को समझने और इसे अपनाने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया, यूरोप, अमेरिका और जापान समेत कई देशों के शेयर बाजार दो साल से अधिक समय से इसी तरह की व्यवस्था अपना रहे हैं जबकि भारत इस मामले में अपने समकक्षों से पीछे है।
पांडेय ने कहा कि तीन अगस्त से शुरू की गई यह व्यवस्था निष्क्रिय निवेशकों, म्यूचुअल फंड के लिए सही शुद्ध परिसंपत्ति मूल्य (एनएवी) तय करने और सूचकांक आधारित निवेशकों के लिए उपयोगी है।
सीएएस कारोबार समाप्त होने के बाद की एक नीलामी प्रक्रिया है, जिसमें खरीद और बिक्री के सौदों के आधार पर शेयरों की अंतिम कीमत तय की जाती है। इसका उद्देश्य बंद भाव को अधिक पारदर्शी तरीके से निर्धारित करना है।
उन्होंने कहा कि पुरानी व्यवस्था में देर से होने वाले कारोबार के जरिये हेराफेरी का जोखिम था।
यह पूछे जाने पर कि क्या सेबी ने नई व्यवस्था में किसी तरह की हेराफेरी देखी है, पांडेय ने कहा कि ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है।
उन्होंने कहा, ‘‘सीएएस मूल रूप से एक पारदर्शी बाजार है, वहां कीमत हमेशा दिखाई देती है और इसमें भागीदारी बढ़नी चाहिए।’’
उन्होंने कहा कि सेबी सभी संबंधित पक्षों से उनकी प्रतिक्रिया जानने के लिए बातचीत कर रहा है।
पांडेय ने कहा कि जरूरत पड़ने पर सेबी इस व्यवस्था में बदलाव करने को तैयार है। फिलहाल मुख्य समस्या इस प्रणाली को समझने से जुड़ी है।
इसके साथ ही सेबी प्रमुख ने कहा कि नियामक अगले आठ-दस दिन में खुदरा निवेशकों को डेरिवेटिव बाजार में हुए नुकसान पर अपने अध्ययन के निष्कर्षों से जुड़ा नया दस्तावेज जारी करने पर विचार कर रहा है। उन्होंने कहा कि इसके कुछ निष्कर्ष बाजार से जुड़े लोगों को चौंका सकते हैं।
इससे पहले वैश्विक जिंस सम्मेलन में पांडेय ने कहा कि बाजार की वृद्धि उत्साहजनक है, लेकिन केवल आकार पर्याप्त नहीं है क्योंकि भारत कई जिंसों का बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता है।
उन्होंने सवाल किया कि क्या भारत का आर्थिक महत्व कीमत निर्धारण में अधिक प्रभाव में बदल सकता है और क्या देश कीमत स्वीकार करने वाले से कीमत तय करने वाले की भूमिका में आ सकता है।
पांडेय ने कहा कि सेबी एक चरणबद्ध व्यवस्था के तहत जिंस सूचकांकों और भौतिक रूप से निपटान वाले गैर-कृषि अनुबंधों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की व्यापक भागीदारी की संभावना पर विचार कर रहा है।
भाषा प्रेम
प्रेम अजय
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