चीनी निर्यात पर रोक का कोई प्रस्ताव नहीं, न्यूनतम बिक्री मूल्य बढ़ाने पर विचार: खाद्य सचिव

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चीनी निर्यात पर रोक का कोई प्रस्ताव नहीं, न्यूनतम बिक्री मूल्य बढ़ाने पर विचार: खाद्य सचिव

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  • Publish Date - April 7, 2026 / 07:41 PM IST,
    Updated On - April 7, 2026 / 07:41 PM IST

नयी दिल्ली, सात अप्रैल (भाषा) खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने मंगलवार को कहा कि घरेलू आपूर्ति बढ़ाने के लिए चीनी निर्यात पर रोक लगाने का कोई प्रस्ताव नहीं है और सरकार चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य को बढ़ाने की उद्योग की मांग पर विचार कर रही है।

सचिव ने कहा कि चीनी की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं और पर्याप्त घरेलू आपूर्ति के कारण आगे चलकर दरों में उछाल आने की आशंका नहीं है।

उन्होंने यह भी बताया कि सरकारी अधिकारियों की एक समिति गठित की गई है, जो एथनॉल की अतिरिक्त उत्पादन क्षमता का उपयोग करने के तरीकों पर विचार करेगी। इसमें पेट्रोल के साथ एथनॉल के मिश्रण को मौजूदा 20 प्रतिशत से बढ़ाना भी शामिल है।

चोपड़ा ने कहा कि खाद्य तेलों पर आयात शुल्क कम करने का कोई प्रस्ताव नहीं है।

सचिव ने कहा कि गेहूं की फसल, जिसकी कटाई अभी चल रही है, इस साल अच्छी है और हाल की बारिश को देखते हुए सरकार खाद्यान्न की खरीद के लिए गुणवत्ता मानदंडों में ढील दे सकती है।

चोपड़ा ने यहां ‘इस्मा शुगर एनएक्सटी 2026’ सम्मेलन के दौरान एक सवाल के जवाब में कहा, ‘‘अभी तक, चीनी निर्यात पर रोक लगाने का कोई प्रस्ताव नहीं है।’’ उनसे घरेलू आपूर्ति बढ़ाने के लिए निर्यात पर रोक की संभावना वाली खबरों के बारे में पूछा गया था।

उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक कीमतें मजबूत हुई हैं, जिससे भारत से निर्यात की संभावनाएं बेहतर हुई हैं।

फिर भी, चोपड़ा ने कहा कि मिलों के लिए मौजूदा 2025-26 चीनी विपणन वर्ष (अक्टूबर-सितंबर) के लिए खाद्य मंत्रालय द्वारा अनुमोदित 15 लाख टन के कोटे का निर्यात करना ‘चुनौतीपूर्ण’ होगा।

सचिव ने कहा कि यदि निर्यात अनुमोदित मात्रा से कम होता है, तो चीनी का अंतिम स्टॉक अधिक होगा; इससे अगले विपणन वर्ष में एथनॉल बनाने के लिए चीनी के अधिक उपयोग (डायवर्जन) में लचीलापन मिलेगा।

चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) को 31 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़ाने की उद्योग की मांग के संबंध में, उन्होंने कहा कि खाद्य मंत्रालय इस प्रस्ताव पर विचार कर रहा है।

पश्चिम एशिया के मौजूदा संकट और कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि को देखते हुए एथनॉल मिश्रण बढ़ाने की मांग पर चोपड़ा ने कहा, ‘‘उद्योग की ओर से पेट्रोल में एथनॉल के मिश्रण को मौजूदा 20 प्रतिशत से बढ़ाने की मांग है। हमारे पास एथनॉल उत्पादन की 2,000 करोड़ लीटर की अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध है।’’

सचिव ने कहा, ‘‘इस अतिरिक्त क्षमता का उपयोग कैसे किया जाए, इस पर विचार करने के लिए एक समिति बनाई गई है। अगले एथनॉल आपूर्ति वर्ष से पहले हमें इस बारे में कुछ खबर मिल सकती है।’’

चोपड़ा ने कहा कि कई विकल्प मौजूद हैं, जिनमें एथनॉल मिश्रण में वृद्धि और फ्लेक्स फ्यूल वाहनों को बढ़ावा देना शामिल है।

उन्होंने कहा कि खाद्य, पेट्रोलियम और भारी उद्योग मंत्रालयों के अधिकारी इस समिति का हिस्सा हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि एथनॉल मिश्रण कार्यक्रम के कारण वर्ष 2014 से अब तक 1.75 लाख करोड़ रुपये की भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा की बचत हुई है।

चोपड़ा ने कहा कि चीनी की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। ‘‘मुझे कीमतों में किसी भी तरह की उछाल या तेज़ी की उम्मीद नहीं है।’’

गन्ने के बकाया भुगतान के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि स्थिति नियंत्रण में है और उन्हें उम्मीद है कि मिलों के लिए किसानों का भुगतान करना कोई चुनौती नहीं होगी, क्योंकि निर्यात और एथनॉल मिश्रण कार्यक्रम से उन्हें नकदी की उपलब्धता मिल रही है।

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे नहीं लगता कि गन्ने का बकाया भुगतान हमारे लिए कोई समस्या खड़ी करेगा।’’

चीनी उत्पादन के अनुमानों पर चोपड़ा ने कहा कि सितंबर में समाप्त होने वाले चालू विपणन वर्ष 2025-26 में, एथनॉल के लिए चीनी के उपयोग से पहले, उत्पादन लगभग 320-325 लाख टन रहने की उम्मीद है। उद्योग को उम्मीद है कि एथनॉल बनाने के लिए 35 लाख टन चीनी का उपयोग किया जाएगा।

इससे पहले, सम्मेलन को संबोधित करते हुए, सचिव ने चीनी क्षेत्र में कार्यक्षमता बढ़ाने, गन्ने की पैदावार में वृद्धि करने और गन्ने से चीनी की प्राप्ति दर को बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीकों की मदद लेने पर ज़ोर दिया।

भाषा राजेश राजेश अजय

अजय