ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी के बाद तेल कंपनियों का घाटा कम होकर 600 करोड़ रुपये प्रतिदिन पर

ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी के बाद तेल कंपनियों का घाटा कम होकर 600 करोड़ रुपये प्रतिदिन पर

ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी के बाद तेल कंपनियों का घाटा कम होकर 600 करोड़ रुपये प्रतिदिन पर
Modified Date: May 25, 2026 / 04:49 pm IST
Published Date: May 25, 2026 4:49 pm IST

नयी दिल्ली, 25 मई (भाषा) पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने सोमवार को कहा कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में चार चरणों में हुई करीब 7.5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी से सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों का घाटा कम होकर लगभग 600 करोड़ रुपये प्रतिदिन रह गया है।

संयुक्त सचिव ने कहा कि 15 मई से शुरू हुए मूल्य संशोधन से पहले पेट्रोल, डीजल और घरेलू रसोई गैस एलपीजी की बिक्री पर तेल कंपनियों को करीब 1,000 करोड़ रुपये प्रतिदिन का घाटा हो रहा था।

शर्मा ने कहा, “घाटा अब कम होकर प्रतिदिन 600 करोड़ रुपये से थोड़ा कम रह गया है।”

उन्होंने बताया कि इसमें घरेलू एलपीजी की बिक्री पर होने वाला घाटा भी शामिल है। घरेलू रसोई गैस एलपीजी रियायती दर पर बेची जाती है और लागत तथा खुदरा बिक्री मूल्य के बीच का अंतर सरकार वहन करती है।

पेट्रोल और डीजल को बाजार आधारित मूल्य निर्धारण वाले उत्पाद माना जाता है। ईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में 50 प्रतिशत से अधिक वृद्धि होने के बावजूद सरकारी तेल कंपनियों ने खुदरा कीमतों में लंबे समय तक बदलाव नहीं किया, जिससे इन उत्पादों पर घाटा बढ़ता गया।

भाषा योगेश रमण

रमण


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