तेल कीमत बढ़ने से आईओसी,बीपीसीएल,एचपीसीएल का लाभ प्रभावित होने की आशंका:एसएंडपी

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तेल कीमत बढ़ने से आईओसी,बीपीसीएल,एचपीसीएल का लाभ प्रभावित होने की आशंका:एसएंडपी

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  • Publish Date - March 11, 2026 / 02:06 PM IST,
    Updated On - March 11, 2026 / 02:06 PM IST

नयी दिल्ली, 11 मार्च (भाषा) अमेरिका-ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के मद्देनजर तेल विपणन कंपनियों इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) का लाभ प्रभावित होने की आशंका है क्योंकि मुद्रास्फीति को नियंत्रित रखने के लिए वे पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों को स्थिर रख सकती हैं। रेटिंग एजेंसी एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने बुधवार को यह बात कही।

अमेरिका-ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। सप्ताह की शुरुआत में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से अधिक हो गई थी क्योंकि वैश्विक तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा संभालने वाला होर्मुज जलडमरूमध्य प्रभावी रूप से बंद था। बाद में बुधवार को कीमतें घटकर करीब 88 डॉलर प्रति बैरल पर आ गईं।

एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने 2026 के लिए ब्रेंट कच्चे तेल की औसत कीमत का अनुमान पांच डॉलर बढ़ाकर 65 डॉलर प्रति बैरल कर दिया है।

एजेंसी के अनुसार, भारत को अपनी कच्चे तेल की जरूरतें पूरी करने के लिए समुद्री मार्गों पर निर्भर रहना पड़ेगा, हालांकि आपूर्ति स्रोतों में विविधता लाने की कुछ गुंजाइश है। भारत पहले भी एशिया के बाहर रूस और दक्षिण अमेरिका जैसे क्षेत्रों से तेल खरीदता रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार रूस से भारत का आयात फिलहाल करीब 11 लाख बैरल प्रतिदिन है जबकि वेनेजुएला से आयात पिछले महीने फिर शुरू हुआ और यह लगभग 1,42,000 बैरल प्रतिदिन पर पहुंच गया है।

भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का करीब 88 प्रतिशत आयात करता है और दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है। देश की कुल खपत लगभग 58 लाख बैरल प्रतिदिन है जिसमें से करीब 25 से 27 लाख बैरल होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर आता है।

एसएंडपी ने कहा कि इस मार्ग पर उच्च निर्भरता के बावजूद भारत के पास सीमित भंडार है। देश के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार लगभग 10 दिन की खपत के लिए पर्याप्त हैं जबकि वाणिज्यिक भंडार करीब 65 दिन के लिए पर्याप्त हो सकता है। एलपीजी और एलएनजी के भंडार इससे भी कम हैं।

रिपोर्ट के अनुसार बढ़ती कीमतें एवं सरकारी निर्देश तेल कंपनियों के मुनाफे को कम कर सकते हैं। हालांकि, ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ओएनजीसी) पर जोखिम कम होगा क्योंकि ऊंची कीमतों से उनकी बिक्री बढ़ती है और उनका पश्चिम एशिया से परिचालन जोखिम सीमित है।

किन्तु तेल विपणन कंपनियों को बाजार और नियामकीय दोनों प्रकार की चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।

एसएंडपी ने कहा, ‘‘ भारत में उपभोक्ताओं के लिए एलपीजी की कीमतें नियंत्रित हैं। बढ़ती कीमतों के बीच आईओसी, बीपीसीएल और एचपीसीएल को मुद्रास्फीति पर काबू रखने के लिए पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें स्थिर रखनी पड़ सकती हैं। इससे उनके ‘मार्जिन’ पर असर पड़ सकता है।’’

एजेंसी ने कहा कि सरकार पहले की तरह बजटीय आवंटन या उत्पाद शुल्क में कटौती के जरिये इन कंपनियों पर पड़ने वाले दबाव को कम कर सकती है, जैसा उसने रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान किया था लेकिन ऐसे कदम उठाए जाने की संभावना अभी स्पष्ट नहीं है।

भाषा निहारिका मनीषा

मनीषा