कर्नाटक, झारखंड और महाराष्ट्र में कम बारिश के कारण धान का रकबा 3.65 प्रतिशत घटा

कर्नाटक, झारखंड और महाराष्ट्र में कम बारिश के कारण धान का रकबा 3.65 प्रतिशत घटा

कर्नाटक, झारखंड और महाराष्ट्र में कम बारिश के कारण धान का रकबा 3.65 प्रतिशत घटा
Modified Date: August 17, 2026 / 08:02 pm IST
Published Date: August 17, 2026 8:02 pm IST

नयी दिल्ली, 17 अगस्त (भाषा) मौजूदा खरीफ सत्र में धान की बुवाई का रकबा 3.65 प्रतिशत घटकर 379.07 लाख हेक्टेयर रह गया है, जबकि एक साल पहले यह 393.44 लाख हेक्टेयर था। कर्नाटक, झारखंड और महाराष्ट्र में कम बारिश के कारण बुवाई का रकबा कम रहा है। कृषि मंत्रालय के सोमवार को जारी आंकड़ों में यह जानकारी दी गई है।

खरीफ फसलों की बुवाई आमतौर पर जून में दक्षिण-पश्चिम मानसून की शुरुआत के साथ जोर पकड़ती है। हालांकि, इस साल अल-नीनो की स्थितियों के कारण यह देरी से शुरू हुई।

मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, धान की बुवाई के रकबे में सबसे बड़ी गिरावट कर्नाटक (2.86 लाख हेक्टेयर की कमी) में देखी गई। इसके बाद झारखंड (2.26 लाख हेक्टेयर की कमी), महाराष्ट्र (2.25 लाख हेक्टेयर की कमी), ओडिशा (में 2.09 लाख हेक्टेयर की कमी), मध्य प्रदेश (1.64 लाख हेक्टेयर की कमी), तेलंगाना (1.49 लाख हेक्टेयर की कमी) और आंध्र प्रदेश (में 1.14 लाख हेक्टेयर की कमी) का स्थान है।

हालांकि, दलहन और तिलहन फसलों की बुवाई का रकबा पिछले साल के स्तर के करीब ही रहा। 14 अगस्त तक दलहनों की बुवाई 108.14 लाख हेक्टेयर में की गई, जो एक साल पहले के 108.49 लाख हेक्टेयर से थोड़ी कम है।

दलहनों में, अरहर का रकबा 42.01 लाख हेक्टेयर से घटकर 40.31 लाख हेक्टेयर और मूंग का रकबा 33.42 लाख हेक्टेयर से घटकर 32.05 लाख हेक्टेयर रह गया, जबकि उड़द का रकबा इस रुख के उलट 20.79 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 23.52 लाख हेक्टेयर हो गया।

तिलहन की बुवाई, जिसमें शुरुआती कमी को काफी हद तक पूरा कर लिया गया था, 184.46 लाख हेक्टेयर में हुई — जो पिछले साल के 185.36 लाख हेक्टेयर से थोड़ी कम है।

दूसरी ओर, मोटे अनाज का रकबा 172.96 लाख हेक्टेयर रहा, जबकि एक साल पहले यह 177.13 लाख हेक्टेयर था। यानी मोटे अनाज के बुवाई के रकबे में कमी आई है।

नकदी फसलों में, गन्ने की खेती का रकबा 58.62 लाख हेक्टेयर से थोड़ा घटकर 58.31 लाख हेक्टेयर रह गया और कपास का रकबा 108.26 लाख हेक्टेयर से घटकर 107.30 लाख हेक्टेयर रह गया। हालांकि, जूट एवं मेस्टा का रकबा 6.23 लाख हेक्टेयर से थोड़ा बढ़कर 6.34 लाख हेक्टेयर हो गया।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के आंकड़ों के अनुसार, 12 अगस्त तक कुल मानसून की कमी 12 प्रतिशत थी। बारिश की सबसे अधिक कमी पूर्वी और पूर्वोत्तर राज्यों में 26 प्रतिशत रही, इसके बाद दक्षिणी प्रायद्वीप में 19 प्रतिशत और उत्तर-पश्चिम भारत में 11 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।

भाषा राजेश राजेश अजय

अजय


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