नयी दिल्ली, 11 मई (भाषा) कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और सरकार के खुदरा दाम को स्थिर बनाये रखने के कारण विपणन मार्जिन में भारी गिरावट आई है। इससे देश की सरकारी खुदरा पेट्रोलियम कंपनियों को पहली तिमाही में इतना बड़ा घाटा होने का जोखिम है, जिससे पूरे वित्त वर्ष का मुनाफा खत्म हो सकता है।
पश्चिम एशिया में 10 सप्ताह पहले युद्ध शुरू होने के बाद से, सरकारी पेट्रोलियम विपणन कंपनियों (ओएमसी) ने लागत से कम दर पर पेट्रोल, डीजल और खाना पकाने की गैस एलपीजी की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की है। जबकि कई अन्य देशों में राशनिंग लागू की गयी या कीमतों में भारी वृद्धि की गयी।
एक सूत्र ने बताया कि इसके परिणामस्वरूप तीनों विपणन कंपनियों… इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लि. (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लि. (एचपीसीएल) बड़े स्तर पर अंडर रिकवरी यानी नुकसान का सामना कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि पेट्रोल, डीजल और खाना पकाने की गैस (एलपीजी) पर संयुक्त रूप से नुकसान (लागत और खुदरा कीमतों के बीच अंतर) प्रतिदिन 1,000 करोड़ रुपये से 1,200 करोड़ रुपये है।
कच्चे तेल की कीमतों में 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी के बावजूद, पेट्रोल और डीजल की कीमतें दो साल पुराने स्तर क्रमशः 94.77 रुपये प्रति लीटर और 87.67 रुपये प्रति लीटर पर बनी हुई हैं। वहीं एलपीजी की कीमतों में मार्च में 60 रुपये प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी की गई थी, लेकिन ये कीमतें अभी भी वास्तविक लागत से काफी कम हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘मौजूदा तेल कीमतों पर, चालू तिमाही (अप्रैल-जून) में हुए नुकसान से कंपनी का पूरे साल का लगभग 76,000 करोड़ रुपये का मुनाफा खत्म हो जाएगा।’’
सूत्र ने कहा कि संकट के पहले महीने (मार्च) में हुए नुकसान को भी शामिल करने पर कुल नुकसान लगभग एक लाख करोड़ रुपये बैठता है।
पेट्रोलियम कंपनियां वर्तमान में पेट्रोल पर 14 रुपये प्रति लीटर, डीजल पर 42 रुपये प्रति लीटर और खाना पकाने की गैस (एलपीजी) पर 674 रुपये प्रति लीटर का घाटा उठा रही हैं।
इस बारे में इक्रा लि. के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और सह-समूह प्रमुख (कॉरपोरेट रेटिंग्स) प्रशांत वशिष्ठ ने कहा, ‘‘वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और उत्पादों की ऊंची कीमतों के कारण पेट्रोलियम विपणन कंपनियां वाहन ईंधन और घरेलू एलपीजी बिक्री पर भारी घाटा उठा रही हैं।
इक्रा का अनुमान है, ‘‘120 से 125 डॉलर प्रति बैरल के कच्चे तेल की कीमतों पर…. विपणन कंपनियों को वाहन ईंधन और घरेलू एलपीजी की बिक्री पर प्रतिदिन लगभग 1,000 करोड़ रुपये का घाटा होता है। इस स्तर का नुकसान कंपनियों के लिए टिकाऊ मामला नहीं है और अगर कच्चे तेल और अन्य उत्पादों की ऊंची कीमतें लंबे समय तक बनी रहती हैं, तो इस पर ध्यान देना होगा।’’
भाषा रमण अजय
अजय