आभूषण संगठन ने खरीदारी कम करने के बजाय घरेलू सोने के इस्तेमाल पर जोर दिया

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आभूषण संगठन ने खरीदारी कम करने के बजाय घरेलू सोने के इस्तेमाल पर जोर दिया

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  • Publish Date - May 11, 2026 / 09:46 PM IST,
    Updated On - May 11, 2026 / 09:46 PM IST

नयी दिल्ली, 11 मई (भाषा) विदेशी मुद्रा से जुड़ी समस्याओं का बेहतर समाधान आभूषणों की खरीदारी टालने के बजाय घरेलू सोने का इस्तेमाल हो सकता है। उद्योग निकाय एआईजेजीएफ ने सोमवार को यह बात कही।

संगठन ने चेतावनी दी कि खरीदारी कम होने से 3.5 करोड़ लोगों की आजीविका पर संकट आ सकता है।

ऑल इंडिया ज्वेलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन (एआईजेजीएफ) ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा कीमती धातुओं की खरीदारी टालने के सुझाव की जगह देश के घरेलू सोने के इस्तेमाल में आमूल-चूल बदलाव का आह्वान किया।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री ने रविवार को नागरिकों से अपील की थी कि पश्चिम एशिया युद्ध के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आए व्यवधान को देखते हुए देश के विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के लिए सोने की खरीदारी कुछ समय के लिए टाल दें।

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को लिखे पत्र में एआईजेजीएफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज अरोड़ा ने कहा कि विदेशी मुद्रा भंडार और बढ़ते आयात बिल पर सरकार की चिंता समझ में आती है, लेकिन बिना किसी संरचनात्मक विकल्प के सोने की खरीद को हतोत्साहित करने वाली सार्वजनिक अपील से आभूषण उद्योग को भारी नुकसान होने का खतरा है।

अरोड़ा ने कहा, ‘‘विदेशी मुद्रा भंडार की रक्षा करने का इरादा सही है, लेकिन इसका समाधान मांग को खत्म करना नहीं होना चाहिए। इसका समाधान घरेलू सोने का फिर से इस्तेमाल और भारत के बिना उपयोग वाले स्वर्ण भंडार को उत्पादक प्रचलन में लाना होना चाहिए।’’

फेडरेशन ने चेतावनी दी कि उपभोक्ता धारणा में अचानक नकारात्मक बदलाव से खरीदारी कम हो सकती है, विनिर्माण घट सकता है और छोटे स्वर्णकार तथा कारीगरों की आय प्रभावित हो सकती है।

अरोड़ा ने लिखा, ‘‘यह केवल सोने के व्यापार का मुद्दा नहीं है, बल्कि आजीविका का मुद्दा है। करोड़ों भारतीय परिवारों के लिए आभूषण केवल विलासिता नहीं, बल्कि बचत का एक रूप है।’’

इसके विकल्प के रूप में एआईजेजीएफ ने एक विशेष ‘सर्राफा बैंक’ स्थापित करने का प्रस्ताव दिया है। संगठन ने यह भी सुझाव दिया कि गोल्ड ईटीएफ को अपनी भौतिक होल्डिंग का 20-30 प्रतिशत हिस्सा एक विनियमित ढांचे के माध्यम से उधार देने की अनुमति दी जानी चाहिए। साथ ही, सरकार की स्वर्ण मौद्रीकरण योजना (जीएमएस) को फिर पेश करने का सुझाव भी दिया गया।

भाषा पाण्डेय अजय

अजय