नयी दिल्ली, छह अगस्त (भाषा) संसद की एक समिति ने सरकार को सुझाव दिया है कि भारतीय चाय की प्रतिस्पर्धी क्षमता बढ़ाने और वैश्विक बाजार में इसकी मौजूदगी को बेहतर करने के लिए प्रक्रिया से जुड़ी रुकावटों को कम किया जाए और कारोबार सुगमता को और बेहतर बनाया जाए।
वाणिज्य से जुड़ी संसद की स्थायी समिति की एक रिपोर्ट में प्रमाणीकरण और अनुपालन प्रक्रिया को आसान बनाने का भी सुझाव दिया गया है, ताकि निर्यातक नए और उभरते हुए बाजार तक पहुंच सकें।
रिपोर्ट में कहा गया है कि निर्यातक को उपलब्ध सहायता, गुणवत्ता मानक और बाजार की जरूरतों के बारे में अच्छी तरह जानकारी हो, यह पक्का करने के लिए जागरूकता और पहुंच कार्यक्रम को मजबूत किया जा सकता है।
रिपोर्ट में आगे कहा गया, ‘‘समिति का मानना है कि प्रक्रिया से जुड़ी रुकावटों को कम करने और कारोबार सुगमता को बेहतर बनाने से भारतीय चाय की प्रतिस्पर्धिता बढ़ाने और वैश्विक बाजार में इसकी मौजूदगी बढ़ाने में काफ़ी मदद मिलेगी।’’
इसने भारत-नेपाल व्यापार संधि के तहत व्यापार में असंतुलन पर चिंता जताई, जिसमें नेपाल को भारतीय बाजार में शुल्क मुक्त पहुंच मिलती है, जबकि घरेलू चाय निर्यात को नेपाल में 40 प्रतिशत के ऊंचे शुल्क का सामना करना पड़ता है।
इसमें आगे कहा गया, ‘‘इसलिए, समिति अपनी इस सिफ़ारिश को दोहराती है कि सरकार नेपाल सरकार के साथ बाजार तक पहुंच में बराबरी का मुद्दा उठाए, चाय से जुड़े व्यापार के नियमों की व्यापक समीक्षा करे और भारतीय व्यापारियों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करे।’’
रबड़ क्षेत्र के बारे में, समिति ने घरेलू उत्पादकों के लिए निष्पक्ष और प्रतिस्पर्धी माहौल बनाए रखने के लिए अलग-अलग मुक्त व्यापार समझौते के तहत मिलने वाली आयात शुल्क छूट की व्यापक समीक्षा करने का सुझाव दिया।
भाषा राजेश राजेश अजय
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