चिकित्सकों की हड़ताल पर उच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन करेगी सरकार: फडणवीस

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चिकित्सकों की हड़ताल पर उच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन करेगी सरकार: फडणवीस

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  • Publish Date - August 6, 2026 / 05:44 PM IST,
    Updated On - August 6, 2026 / 05:44 PM IST

मुंबई, छह अगस्त (भाषा) महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बृहस्पतिवार को कहा कि राज्य सरकार होम्योपैथ चिकित्सकों के पंजीकरण के मुद्दे पर हड़ताल को लेकर बंबई उच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन करेगी।

चिकित्सकों के विरोध-प्रदर्शन को अनुचित बताते हुए उन्होंने कहा कि सरकार के पास इस मामले में कोई विकल्प नहीं है और वह (सरकार) हर चिकित्सक को समान रूप से महत्वपूर्ण मानती है, चाहे वे चिकित्सा की किसी भी पद्धति से क्यों न जुड़े हों।

बंबई उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को ‘महाराष्ट्र चिकित्सा परिषद’ (एमएमसी) के तहत होम्योपैथ चिकित्सकों के पंजीकरण के खिलाफ हड़ताल कर रहे रेजिडेंट डॉक्टरों को तुरंत काम पर लौटने का आदेश दिया था। अदालत ने कहा था कि इस विरोध प्रदर्शन से राज्य के अस्पतालों में मरीजों को परेशानी हो रही है।

इसके बाद महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स (एमएआरडी) ने अदालत को भरोसा दिया कि हड़ताल वापस ले ली जाएगी।

एमएआरडी ने सरकार के उस फैसले के विरोध में बुधवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की थी, जिसके तहत होम्योपैथ चिकित्सकों को एमएमसी में पंजीकरण कराने और एलोपैथिक दवाएं लिखने की अनुमति दी गई थी।

यहां पत्रकारों से बातचीत में फडणवीस ने कहा कि सरकार उच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन करने के लिए बाध्य है।

उन्होंने कहा, ‘‘उच्च न्यायालय ने चिकित्सकों से साफतौर पर कहा है कि उन्हें वेतन मिल रहा है, इसलिए उन्हें मरीजों को देखना चाहिए। अगर कुछ भी गलत होता है, तो चिकित्सक ही जिम्मेदार होंगे।’’

उन्होंने कहा, ‘‘उच्च न्यायालय के आदेश हमारे लिए बाध्यकारी हैं। इसी के अनुसार हमने पंजीकरण प्रक्रिया शुरू की है। मामला फिर से उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। हम किसी एक पक्ष का समर्थन करने के बजाय अदालत के निर्देशों के अनुसार काम करेंगे।’’

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार इस विवाद में तटस्थ है। उन्होंने कहा, ‘‘आखिरकार सरकार के पास कोई विकल्प नहीं है। हमारे लिए हर चिकित्सक महत्वपूर्ण है। एलोपैथिक चिकित्सा करने वाले एमबीबीएस चिकित्सक बेहतरीन काम कर रहे हैं। हम उच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन करने के लिए हरसंभव प्रयास करेंगे।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि विरोध प्रदर्शन करना भी उचित नहीं है। मांग क्या है? उच्च न्यायालय ने चिकित्सकों के पंजीकरण को लेकर आदेश दिया था। अन्य चिकित्सा पद्धतियों से जुड़े कुछ चिकित्सकों को उस पंजी में शामिल किया गया था और चिकित्सक इन्हीं प्रविष्टियों का विरोध कर रहे हैं। यदि उच्च न्यायालय अलग पंजी बनाए रखने का निर्देश देता है तो हम उसका पालन करेंगे। हम अदालत के निर्देश के अनुसार काम करेंगे।’’

फडणवीस ने कहा कि उच्च न्यायालय का सम्मान किया जाना चाहिए और सभी को उसके निर्देशों के अनुसार काम करना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार भी अदालत के निर्देशानुसार कदम उठाएगी।

उन्होंने कहा, ‘‘हमारे लिए सभी चिकित्सक बराबर हैं, चाहे वे किसी भी चिकित्सा पद्धति से जुड़े हों। हम उनके बीच कोई भेदभाव नहीं करते। खासकर, हमारे मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में काम करने वाले चिकित्सक हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। मैं उनसे यह भी कहना चाहता हूं कि सरकार का उनके साथ कोई अन्याय करने का इरादा नहीं है। आइए, हम सब अदालत के फैसले का इंतजार करें।’’

मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे द्वारा कुणबी प्रमाणपत्र रद्द किए जाने के आरोपों के बारे में पूछे जाने पर फडणवीस ने कहा कि जाति प्रमाणपत्र जांच समितियां उच्चतम न्यायालय के दिशानिर्देशों के तहत स्वतंत्र रूप से काम करती हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘समिति उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुसार काम कर रही है। राज्य सरकार का उसके काम में कोई हस्तक्षेप नहीं है।’’

मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें रद्द किए गए प्रमाणपत्रों की सटीक संख्या की जानकारी नहीं है, लेकिन कई आवेदन अधूरे दस्तावेजों के कारण खारिज किए गए हैं।

फडणवीस ने कहा कि यहां फिल्म सिटी में शुरू की गई नई ‘प्राइम फोकस’ स्टूडियो परियोजना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के भारत को वैश्विक रचनात्मक केंद्र बनाने के दृष्टिकोण को दर्शाती है।

उन्होंने कहा, ‘‘पिछले साल प्राइम फोकस के साथ एक समझौता हुआ था, जिसके तहत विश्वस्तरीय स्टूडियो और सुविधाएं विकसित करने के लिए तीन हजार करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। आज मैं इसके पहले चरण का उद्घाटन करने आया हूं। प्रधानमंत्री का दृष्टिकोण अब यहां साकार हो रहा है। यह रचनात्मक अर्थव्यवस्था का वैश्विक केंद्र बन गया है।’

भाषा शुभम सुरेश

सुरेश