प्रस्तावित यूपीआई एमडीआर कोई कर या अधिभार नहीं, उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ेगा बोझ: सीतारमण

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प्रस्तावित यूपीआई एमडीआर कोई कर या अधिभार नहीं, उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ेगा बोझ: सीतारमण

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  • Publish Date - September 25, 2026 / 02:26 PM IST,
    Updated On - September 25, 2026 / 02:26 PM IST

नयी दिल्ली, 25 सितंबर (भाषा) वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर प्रस्तावित मर्चेन्ट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) को लेकर विपक्ष की आलोचना को खारिज करते हुए कहा कि यह न तो कर है, न उपकर और न ही अधिभार। उन्होंने कहा कि इससे मिलने वाला एक भी पैसा सरकार को नहीं मिलेगा और न ही इसका कोई उपभोक्ताओं पर बोझ पड़ेगा।

सीतारमण ने पीटीआई वीडियो से कहा कि एमडीआर डिजिटल भुगतान व्यवस्था के भीतर लगाया जाने वाला शुल्क है और इसे यूपीआई लेनदेन की सुविधा देने वाले भुगतान सेवा प्रदाता, व्यापारी का बैंक तथा इस व्यवस्था से जुड़े अन्य भागीदार लेते हैं।

भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) ने 15 अक्टूबर से कारोबारियों को किए जाने वाले 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लगाया गया है। वहीं, 75,000 रुपये या इससे अधिक के भुगतान पर यह शुल्क अधिकतम 300 रुपये होगा। व्यक्ति-से-व्यक्ति लेनदेन और छोटे भुगतान को शुल्क से बाहर रखा गया है।

उन्होंने कहा, ‘‘यह कर नहीं है, यह उपकर नहीं है और न ही अधिभार है। इससे मिलने वाली राशि भारत की संचित निधि में नहीं जाएगी।’’

वित्त मंत्री ने कहा कि इससे प्राप्त राशि यूपीआई से जुड़े बैंकों और अन्य संस्थाओं के बीच बांटी जाएगी।

सूत्रों ने कहा कि कुल एमडीआर में से 40 प्रतिशत राशि ग्राहक के बैंक, 30 प्रतिशत भुगतान सेवा प्रदाता, 20 प्रतिशत यूपीआई ऐप और शेष 10 प्रतिशत राशि यूपीआई ऐप के प्रायोजक बैंक को मिलेगी।

वित्त मंत्री ने कहा कि एमडीआर का बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डाला जाएगा और इसका भुगतान व्यापारी भुगतान व्यवस्था के भीतर ही किया जाएगा।

सीतारमण ने कहा कि शुल्क को भुगतान व्यवस्था से जुड़े भागीदारों के बीच बांटा जाएगा, जिससे प्रौद्योगिकी ढांचे को बनाए रखने तथा डिजिटल भुगतान में सुधार और नवोन्मेष को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।

उन्होंने कहा, ‘‘इसका सरकार से बिल्कुल कोई लेना-देना नहीं है।’’ उन्होंने कहा कि एमडीआर व्यवस्था में एनपीसीआई, व्यापारी, बैंक और अन्य सेवा प्रदाता शामिल हैं।

वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि व्यापारी पहले से ही क्रेडिट और डेबिट कार्ड से किए गए लेनदेन पर एमडीआर का भुगतान करते हैं। इसलिए नई व्यवस्था को उपभोक्ताओं पर लगाए जाने वाले शुल्क के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि रुपे कार्ड से होने वाला लेनदेन निःशुल्क रहेगा। साथ ही 2,000 रुपये से कम के यूपीआई भुगतान पर कोई एमडीआर नहीं लगेगा।

एक अनुमान के अनुसार व्यक्ति से व्यापारियों को होने वाले यूपीआई लेनदेन में करीब 96 प्रतिशत इस नई व्यवस्था से प्रभावित नहीं होंगे।

वित्त मंत्री की यह टिप्पणी प्रस्तावित एमडीआर को लेकर हो रही आलोचना के बीच आई है। इसे लेकर व्यापारियों पर संभावित असर और इस शुल्क का बोझ ग्राहकों पर डाले जाने की आशंका जताई जा रही है।

पंद्रह अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के पात्र यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर का भुगतान व्यापारी करेंगे, उपभोक्ता नहीं। 75,000 रुपये या उससे अधिक के लेनदेन पर यह शुल्क अधिकतम 300 रुपये तक सीमित रहेगा।

व्यक्तियों के बीच होने वाले भुगतान के साथ-साथ रोजमर्रा के अधिकांश व्यापारी भुगतान भी निःशुल्क बने रहेंगे।

रेलवे, दूरसंचार, ईंधन और बीमा जैसी आवश्यक सेवाओं के लिए दो हजार रुपये से अधिक के लेनदेन पर पांच रुपये का तय शुल्क होगा। म्यूचुअल फंड और शेयरों की खरीद-बिक्री जैसे पूंजी बाजार से जुड़े लेनदेन पर 0.02 प्रतिशत शुल्क होगा, जिसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये होगी।

यूपीआई क्यूआर कोड के जरिए हर महीने एक लाख रुपये तक का भुगतान प्राप्त करने वाले छोटे व्यापारी नए शुल्क से पूरी तरह मुक्त रहेंगे। इससे करीब 96 प्रतिशत व्यापारी लेनदेन नए शुल्क के दायरे से बाहर रहेंगे।

यूपीआई का संचालन करने वाले एनपीसीआई ने 15 सितंबर को कुछ यूपीआई लेनदेन पर एमडीआर लगाने संबंधी परिपत्र जारी किया था। इसका उद्देश्य डिजिटल भुगतान व्यवस्था के लिए टिकाऊ आय ढांचा तैयार करना है।

छोटे व्यापारियों के बीच यूपीआई के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष कोष भी बनाया जाएगा। इसमें कुल एमडीआर संग्रह का पांच प्रतिशत योगदान दिया जाएगा। इसका उद्देश्य छोटे कारोबारियों के बीच यूपीआई स्वीकार्यता बढ़ाना, इसके निरंतर इस्तेमाल को प्रोत्साहित करना और डिजिटल भुगतान व्यवस्था में छोटे कारोबारियों की भागीदारी को बढ़ाना है।

भाषा रमण पाण्डेय

पाण्डेय