भोपालः Uniform Civil Code एमपी में यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए सरकार ने कमेटी क्या बनाई उबलते बयानों का बवाल शुरू हो गया। सरकार ने कमिटी को 6 महीने का वक्त दिया है कि वो इस विषय में रायशुमारी करके अपनी रिपोर्ट दे, मगर दोनों तरफ से बयानबाजियां तेज हैं। पहले बात सत्ता पक्ष की।
Uniform Civil Code मंत्री विश्वास सारंग को पता चला कि कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद विरोध कर रहे हैं तो उन्होंने बेहद तल्ख टिप्पणी कर दी। उन्होंने कहा कि इस देश की एकता और अखंडता के लिए UCC जरूरी है। कांग्रेस नेता विरोध कर रहे हैं तो वो पाकिस्तान चले जाएं, आरिफ मसूद जैसे नेता केवल विघटन की राजनीति करते हैं। जाहिर था कि ऐसा बयान कांग्रेस को चुभना ही था। जवाब फौरन आरिफ मसूद का भी उसी अंदाज़ में आया। उन्होंने कहा कि तुम्हारे पुरखे नहीं भेज पाए पाकिस्तान तो तुम क्या भेजोगे? नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार भी UCC के पक्षधर नहीं हैं। उनका आरोप है कि इससे आदिवासियों की परम्पराएं ,रीति रिवाज चौपट हो जाएंगे।
इस देश में सियासत की मुश्किल यही है कि वो “कौवा कान ले गया” की तर्ज पर हाय हाय करने लगती है। कान छू कर नहीं देखती कि साबूत है या नहीं, अभी तय नहीं हुआ कि UCC के दायरे में ट्रायबल होंगे या नहीं। क्योंकि कई राज्यों ने उन्हें इसके दायरे में नहीं रखा..ऐसे में आदिवासी अस्मिता की बात कैसे बीच में आ गई। सवाल ये भी है कि सत्ता पक्ष किसी सरकारी फैसले को भी कौम के सामने चुनौती की तरह क्यों उछालता है? सवाल ये भी कि नियत समय पर एमपी में UCC लागू हो पायेगा भी या नहीं?