मुंबई, चार जून (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा शुक्रवार को मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के फैसले की घोषणा करेंगे।
यह उम्मीद जतायी जा रही है कि केंद्रीय बैंक मुख्य रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रख सकता है, क्योंकि पश्चिम एशिया संकट के कारण महंगाई और आर्थिक वृद्धि के मोर्चे पर पैदा हो रही चुनौतियों को देखते हुए सतर्क रुख अपनाया जा रहा है।
छह सदस्यीय एमपीसी ने अपनी तीन दिवसीय बैठक बुधवार को शुरू की थी।
‘पीटीआई-भाषा’ द्वारा अर्थशास्त्रियों और ट्रेजरी प्रमुखों के बीच किए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार, रिजर्व बैंक इस बार नीतिगत दर में कोई बदलाव नहीं करेगा। हालांकि, अधिकांश प्रतिभागियों का मानना है कि केंद्रीय बैंक वित्त वर्ष 2026-27 में बढ़ती मुद्रास्फीति जोखिमों के बीच मौद्रिक सख्ती फिर से शुरू कर सकता है।
सर्वेक्षण में शामिल 11 प्रतिभागियों ने दरों को यथावत रखने की उम्मीद जताई, जबकि चार ने 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी की संभावना जताई।
अधिकांश प्रतिभागियों ने चालू वित्त वर्ष के दौरान कम से कम दो बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीद जताई है, जबकि कुछ का मानना है कि मुद्रास्फीति दबाव बढ़ने पर इससे अधिक बढ़ोतरी हो सकती है।
भारतीय स्टेट बैंक के चेयरमैन सी. एस. शेट्टी ने बुधवार को एक कार्यक्रम में कहा कि यदि आरबीआई दरों को यथावत रखता है तो मुद्रास्फीति चुनौतियों के बावजूद आर्थिक वृद्धि प्रक्रिया स्थिर रह सकती है।
उन्होंने कहा कि बाजार की अपेक्षाएं भी मुख्य रूप से दरों में ठहराव की ओर संकेत कर रही हैं।
भाषा योगेश रमण
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