आरबीआई को निवेश के लिए नियामकीय मानदंडों पर पुनर्विचार करने की जरूरत: पूर्व डिप्टी गवर्नर राव

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आरबीआई को निवेश के लिए नियामकीय मानदंडों पर पुनर्विचार करने की जरूरत: पूर्व डिप्टी गवर्नर राव

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  • Publish Date - March 18, 2026 / 06:52 PM IST,
    Updated On - March 18, 2026 / 06:52 PM IST

मुंबई, 18 मार्च (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के पूर्व डिप्टी गवर्नर एम. राजेश्वर राव ने बुधवार को कहा कि निवेश के लिए उपयुक्त और उचित यानी नियामकीय मानदंडों पर पुनर्विचार करने की जरूरत है।

पिछले साल सितंबर में पद छोड़ने वाले राव ने कहा कि आर्थिक वृद्धि की गति को तेज करने की आकांक्षा रखने वाली बढ़ती अर्थव्यवस्था को वृद्धि को समर्थन देने के लिए मजबूत वित्तीय संस्थानों की आवश्यकता होगी।

यहां उद्योग मंडल एसोचैम के एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा, ‘‘चुनौती उपयुक्त और उचित निवेशक प्राप्त करने और वैधानिक एवं नियामकीय निर्देशों का पालन करने में है। इस संबंध में नियमों पर पुनर्विचार करना ऐसा विषय है जिस पर केंद्रीय बैंक और सरकार को गंभीरता से विचार करना होगा।’’

राव ने सिद्धांत-आधारित नियामक ढांचे, मजबूत संचालन और पर्यवेक्षी निरीक्षण जैसे उपायों के माध्यम से क्षेत्र में हुए सुधारों का उल्लेख करते हुए क्षेत्र में एकीकरण में सहायता के लिए आरबीआई द्वारा कुछ लचीलापन दिखाने की आवश्यकता बतायी।

उन्होंने कहा, ‘‘शायद अब समय आ गया है कि नियामक निजी क्षेत्र के बैंकों द्वारा एकीकरण और पूंजी जुटाने के लिए कुछ लचीलापन दिखाने पर विचार करे।’’

राव ने कहा कि निजी क्षेत्र के बैंकों के अलावा, दीर्घकालिक विकास की महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए वित्तीय क्षेत्र में एकीकरण की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा, ‘‘हमें मजबूत बैंकों की आवश्यकता है और इसके लिए, वृद्धि पूंजी तक पहुंच के अलावा, वित्तीय सेवा उद्योग में एकीकरण का विकल्प भी अपनाना होगा।’’

राव ने कहा कि 2047 तक लगभग 30,000 अरब डॉलर तक बढ़ने की आकांक्षा रखने वाली 4,000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था के लिए वित्तीय क्षेत्र का विकास भी उसी अनुपात में या उससे भी अधिक होना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि बैंक क्षेत्र में एकीकरण पहले ही हो चुका है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की संख्या वर्ष 2000 के 27 से घटकर इस समय लगभग 12 रह गई है और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की संख्या 196 से घटकर 28 हो गई है।

हालांकि, राव ने आगाह किया कि वृद्धि के लिए पूंजी की आवश्यकता होगी। उन्होंने कहा, ‘‘यदि इनका निजीकरण नहीं किया गया, तो इन इकाइयों को सरकार से पूंजी की आवश्यकता होगी।’’

उन्होंने यह भी कहा कि विनिवेश और विदेशी निवेश की सीमा बढ़ाना विकल्प तो हैं, लेकिन सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में पूंजी जुटाने के लिए अधिक नवोन्मेषी विकल्पों पर विचार करने की आवश्यकता है।

राव ने सहकारी बैंकिंग क्षेत्र में चिंताओं को भी उजागर किया। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र को प्रतिस्पर्धा में बने रहने और प्रौद्योगिकी आधारित बैंकिंग सेवाएं प्रदान करने में चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।

गैर-बैंक ऋणदाताओं के बारे में राव ने कहा कि लगभग 9,300 गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) हैं। इनमें से केवल 300 ही पर्याप्त रूप से मजबूत हैं, बाकी अपेक्षाकृत छोटी हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘हमें कम संख्या में आर्थिक रूप से अधिक मजबूत और बेहतर विनियमित संस्थाओं की आवश्यकता है और इस क्षेत्र में एकीकरण की चुनौती एक ऐसी चीज है जिसके लिए हमें योजना बनानी होगी।’’

भाषा रमण अजय

अजय