मुंबई, छह जनवरी (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने मंगलवार को बैंकों द्वारा शेयरधारकों को दिए जाने वाले लाभांश की सीमा तय करने का प्रस्ताव रखा। इसके तहत कोई भी बैंक अपने शुद्ध लाभ के 75 प्रतिशत से अधिक लाभांश नहीं दे पाएगा।
रिजर्व बैंक ‘लाभांश’ को इक्विटी शेयरों पर देय राशि के रूप में परिभाषित करता है और इसमें अंतरिम लाभांश शामिल है। लेकिन स्थायी गैर-संचयी तरजीही शेयरों पर दिया जाने वाला लाभांश शामिल नहीं है।
प्रस्तावित नियम सभी भारतीय बैंकों पर लागू होगा, जबकि क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक एवं स्थानीय क्षेत्रीय बैंकों के लिए यह सीमा 80 प्रतिशत होगी।
आरबीआई ने इस मसौदे में कहा कि लाभांश देने से पहले बैंक के निदेशक मंडल को दीर्घावधि वृद्धि योजना और पूंजी की स्थिति को ध्यान में रखना होगा।
इसके अलावा बैंक जिस अवधि के लिए लाभांश देने का प्रस्ताव रख रहा है उस दौरान बैंक के शुद्ध लाभ का सकारात्मक होना जरूरी है।
भारत में शाखाएं खोलने वाले विदेशी बैंकों के लिए भी यही नियम लागू होगा। ये बैंक केवल सकारात्मक शुद्ध लाभ वाली अवधि के लिए भी अपने मुख्यालय को लाभ भेज सकते हैं।
इसके साथ ही आरबीआई ने कहा है कि अगर कोई बैंक कानून, नियम या दिशानिर्देशों का पालन नहीं करता है तो लाभांश वितरण या लाभ भेजने पर प्रतिबंध लगाने का अधिकार सुरक्षित रहेगा।
रिजर्व बैंक ने इस मसौदा प्रस्ताव पर जनता और बैंकों से पांच फरवरी तक सुझाव मांगे हैं।
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प्रेम रमण
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