मुंबई, 20 मई (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बकाया कर्ज की वसूली के दौरान सख्त और अनुचित तरीकों पर रोक लगाने के लिए नए नियम प्रस्तावित किए हैं। इसके तहत बैंक चूककर्ता उधारकर्ताओं के मोबाइल फोन की सेवाओं को बंद या सीमित नहीं कर सकेंगे।
केंद्रीय बैंक ने बुधवार को जारी संशोधित मसौदा दिशानिर्देशों में कहा कि कोई भी बैंक कर्ज वसूली के लिए ऐसी प्रौद्योगिकी व्यवस्था का इस्तेमाल नहीं कर सकता, जिससे उधारकर्ता के मोबाइल फोन या टैबलेट की कार्यक्षमता बाधित हो।
हालांकि, आरबीआई ने इस नियम के अपवाद के तौर पर कहा है कि यदि मोबाइल फोन को खुद बैंक द्वारा आवंटित कर्ज से ही खरीदा गया है, तो बैंक उसकी कुछ सुविधाओं को सीमित कर सकता है।
इसके लिए भी शर्त यह है कि मोबाइल फोन का वह ऋण 90 दिन से अधिक समय तक बकाया हो और उधारकर्ता ने नोटिस के बावजूद भुगतान न किया हो।
हालांकि, केंद्रीय बैंक ने कहा है कि बैंक किसी प्रौद्योगिकी की मदद से इंटरनेट, इनकमिंग कॉल, आपातकालीन एसओएस और सरकारी सुरक्षा संदेश जैसी जरूरी सेवाओं को बाधित नहीं कर सकेंगे।
यदि उधारकर्ता बकाया चुका देता है, तो एक घंटे के भीतर सभी सेवाएं बहाल करनी होंगी। ऐसा न करने पर बैंक को 250 रुपये प्रति घंटे के हिसाब से मुआवजा देना होगा।
रिजर्व बैंक ने यह भी स्पष्ट किया कि कर्ज वसूली के लिए नियुक्त एजेंटों द्वारा अभद्र भाषा का इस्तेमाल, सोशल मीडिया पर उधारकर्ता की जानकारी साझा करना, या बार-बार कॉल करना और संदेश भेजना ‘कठोर वसूली तरीकों’ में शामिल होगा। इन सभी तरीकों पर रोक रहेगी।
दिशानिर्देशों के मसौदे के अनुसार, बैंकों को वसूली कॉल का रिकॉर्ड रखना होगा, जिसमें कॉल की संख्या, समय और बातचीत का विवरण शामिल होगा।
केंद्रीय बैंक ने कहा कि इन प्रस्तावित नियमों को एक अक्टूबर, 2026 से लागू करने की योजना है। हितधारक 31 मई तक अपने सुझाव दे सकते हैं।
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