प्रतिभूति बाजार के माध्यम से घरेलू बचत 2024-25 में बढ़कर 6.91 लाख करोड़ रुपये पर

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प्रतिभूति बाजार के माध्यम से घरेलू बचत 2024-25 में बढ़कर 6.91 लाख करोड़ रुपये पर

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  • Publish Date - May 20, 2026 / 09:41 PM IST,
    Updated On - May 20, 2026 / 09:41 PM IST

नयी दिल्ली, 20 मई (भाषा) भारतीय परिवारों में वित्तीय परिसंपत्तियों के प्रति आकर्षण लगातार बढ़ रहा है। इसका पता इस बात से लगता है कि प्रतिभूति बाजार के माध्यम से की गई बचत बढ़कर 2024-25 में 6.91 लाख करोड़ रुपये हो गई जो इससे पिछले वित्त वर्ष में 3.58 लाख करोड़ रुपये थी। सेबी के अधिकारियों के एक शोध पत्र में यह कहा गया है।

शोध पत्र में कहा गया है कि संशोधित अनुमान वित्त वर्ष 2024-25 के लिए पिछली पद्धति के अनुसार दर्ज किए जाने वाले 5.43 लाख करोड़ रुपये से काफी अधिक है।

इसके परिणामस्वरूप, 2024-25 के लिए भारत का सकल बचत-जीडीपी अनुपात 0.47 प्रतिशत बढ़कर 34.94 प्रतिशत हो गया, जबकि पूर्व पद्धति के अनुसार यह 34.47 प्रतिशत था।

प्रभास कुमार रथ, शाइनी सुनील और कल्याणी एच द्वारा लिखे गए इस शोध पत्र में कहा गया है कि प्रतिभूति बाजार के माध्यम से की गई घरेलू बचत वित्तीय बचत का एक महत्वपूर्ण घटक है और सोने तथा अचल संपत्ति जैसी पारंपरिक परिसंपत्तियों के मुकाबले आकर्षक विकल्प के रूप में उभर रही है।

लेखकों ने बुधवार को सेबी की वेबसाइट पर डाले गए शोध पत्र में कहा कि हालांकि परंपरागत रूप से सोने और अचल संपत्ति जैसी भौतिक संपत्तियों को प्राथमिकता दी जाती रही है, लेकिन उच्च प्रतिफल और नकदी की संभावना के कारण वित्तीय संपत्तियां लोकप्रियता हासिल कर रही हैं।

उन्होंने कहा कि निवेश पर कर प्रोत्साहन, वित्तीय समावेश कार्यक्रम और डिजिटल बैंकिंग जैसी सरकारी उपायों ने भी भारतीय परिवारों को वित्तीय संपत्तियों के प्रति आकर्षण बढ़ाया है।

सेबी ने स्पष्ट किया कि शोध पत्र में व्यक्त निष्कर्ष और विचार लेखकों के हैं और जरूरी नहीं कि वे नियामक की आधिकारिक स्थिति को प्रतिबिंबित करते हों।

यह अध्ययन भारतीय प्रतिभूति बाजार के माध्यम से घरेलू बचत की गणना में सेबी द्वारा भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) के परामर्श से पद्धति में किए गए बदलाव के व्यापक आर्थिक प्रभाव की जांच करता है।

संशोधित पद्धति को नए 2022-23 आधार वर्ष के साथ राष्ट्रीय लेखा श्रृंखला में शामिल किया गया है।

इससे पहले, आरबीआई और सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय प्रतिभूति बाजार के माध्यम से घरेलू बचत की गणना के लिए काफी हद तक अनुमानों पर निर्भर थे। पुरानी व्यवस्था के तहत, इक्विटी शेयर में सार्वजनिक और राइट्स इश्यू का 35 प्रतिशत, कॉरपोरेट बॉन्ड के सार्वजनिक निर्गम का 40 प्रतिशत और म्यूचुअल फंड में वास्तविक निवेश को घरेलू बचत के रूप में माना जाता था।

हालांकि, इसमें तरजीही आवंटन, प्रतिभूतियों के निजी नियोजन, द्वितीयक बाजार लेनदेन और रीट (रियल एस्टेट निवेश ट्रस्ट), इनविट (अवसंरचना ढांचा निवेश ट्रस्ट) तथा वैकल्पिक निवेश फंड (एआईएफ) जैसे निवेश के नये साधन के जरिये होने वाले निवेश शामिल नहीं थे।

नई पद्धति डिपॉजिटरी, शेयर बाजार और एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एएमएफआई) से प्राप्त वास्तविक विस्तृत आंकड़ों का उपयोग करके विभिन्न उत्पादों और बाजार खंडों की व्यापक श्रेणी में घरेलू निवेश को शामिल करती है।

शोध पत्र के अनुसार, प्रतिभूति बाजार के माध्यम से घरेलू बचत 2022-23 में 2.60 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2023-24 में 3.58 लाख करोड़ रुपये और 2024-25 में 6.91 लाख करोड़ रुपये हो गई।

वित्त वर्ष 2024-25 में प्राथमिक बाजार निवेश 6.32 लाख करोड़ रुपये रहा। इसमें म्यूचुअल फंड का योगदान 5.13 लाख करोड़ रुपये और इक्विटी का योगदान 95,139 करोड़ रुपये रहा।

आलोच्य वर्ष में द्वितीयक बाजार निवेश का योगदान 59,452 करोड़ रुपये रहा। इसमें ऋण प्रतिभूतियों, एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड, रीट और इनविट में शुद्ध निवेश शामिल है।

रिपोर्ट के अनुसार, प्रतिभूति बाजार के माध्यम से घरेलू बचत 2024-25 में जीडीपी का 2.17 प्रतिशत रही, जबकि पिछली पद्धति के अनुसार यह 1.71 प्रतिशत थी।

इसी प्रकार, घरेलू बचत-जीडीपी अनुपात 21.23 प्रतिशत से बढ़कर 21.7 प्रतिशत हो गया, जबकि शुद्ध घरेलू वित्तीय बचत जीडीपी के 6.63 प्रतिशत से बढ़कर 7.10 प्रतिशत हो गई।

सैमको ग्रुप के संस्थापक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) जिमीत मोदी ने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वित्त वर्ष 2024-25 में परिवार प्रत्यक्ष इक्विटी में 54,786 करोड़ रुपये के शुद्ध बिकवाल रहे, जबकि इससे पिछले वर्ष यह बिक्री 69,329 करोड़ रुपये थी। इसके बावजूद उन्होंने म्यूचुअल फंड में रिकॉर्ड निवेश किया।

उन्होंने कहा, ‘‘यह पीछे हटने का मामला नहीं है, बल्कि परिपक्वता है…। खुदरा निवेशक प्रत्यक्ष इक्विटी में लाभ दर्ज कर रहे हैं और अपनी नई बचत को पेशेवर रूप से प्रबंधित निवेश साधनों में लगा रहे हैं।’’

रिपोर्ट में यह भी अनुमान लगाया गया है कि भारतीय प्रतिभूति बाजारों में परिवारों की कुल संपत्ति (जिसमें इक्विटी, म्यूचुअल फंड, ऋण प्रतिभूतियां, आरईआईटी, इनविटेशनल इन्वेस्टमेंट और एआईएफ शामिल हैं) 2024-25 के अंत तक 141.34 लाख करोड़ रुपये थी।

इसमें से इक्विटी होल्डिंग्स 88.92 लाख करोड़ रुपये, म्यूचुअल फंड निवेश 44.39 लाख करोड़ रुपये और एआईएफ निवेश 1.55 लाख करोड़ रुपये थे।

भाषा रमण अजय

अजय