आरबीआई ने बैंक निदेशक मंडल के समय के ‘सदुपयोग’ के लिए नियमों में संशोधन का रखा प्रस्ताव

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आरबीआई ने बैंक निदेशक मंडल के समय के ‘सदुपयोग’ के लिए नियमों में संशोधन का रखा प्रस्ताव

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  • Publish Date - April 8, 2026 / 12:47 PM IST,
    Updated On - April 8, 2026 / 12:47 PM IST

(तस्वीर के साथ)

मुंबई, आठ अप्रैल (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कारोबार सुगमता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बैंकों के निदेशक मंडल के समय का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने के लिए दिशानिर्देशों में संशोधन और उन्हें तर्कसंगत बनाने का बुधवार को प्रस्ताव रखा। इस संबंध में मसौदा निर्देश शीघ्र ही जारी किए जाएंगे।

बैंकों के निदेशक मंडल के समक्ष रखे जाने वाले विषय और उनकी आवृत्ति का निर्धारण वर्तमान में स्वयं निदेशक मंडल करते हैं जो आरबीआई द्वारा निर्धारित सात व्यापक विषयों के आधार पर होता है।

साथ ही आरबीआई ने कुछ नीतियों एवं विषयों को स्वीकृति, समीक्षा या जानकारी के लिए निदेशक मंडल के समक्ष रखना अनिवार्य किया हुआ है।

आरबीआई ने विकासात्मक एवं नियामकीय नीतियों पर बयान में कहा, ‘‘ निदेशक मंडल को अपने समय का प्रभावी ढंग से उपयोग करने में सक्षम बनाने और रणनीति एवं जोखिम प्रबंधन पर अधिक केंद्रित तथा गुणात्मक जुड़ाव को सुगम बनाने के प्रयास में, भारतीय रिजर्व बैंक ने ऐसे सभी निर्देशों की व्यापक समीक्षा और युक्तिकरण किया है। इस संबंध में निर्देशों के मसौदे को शीघ्र ही सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी किया जाएगा।’’

यह घोषणा एचडीएफसी बैंक के चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के हाल ही में नैतिक चिंताओं का हवाला देते हुए अचानक इस्तीफा देने के कुछ सप्ताह बाद आई है।

चक्रवर्ती ने 17 मार्च को अपने इस्तीफे में कहा था, ‘‘ पिछले दो वर्ष में बैंक के भीतर कुछ घटनाएं एवं प्रक्रियाएं ऐसी थीं जो मेरे व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिकता के अनुरूप नहीं हैं। यही मेरे इस निर्णय का आधार है।’’

यह पहला अवसर था जब एचडीएफसी बैंक के अंशकालिक चेयरमैन ने कार्यकाल के बीच में पद छोड़ दिया, जिससे बैंक के कामकाज को लेकर सवाल उठे।

मौद्रिक नीति समिति की बैठक के फैसलों की घोषणा करते हुए मल्होत्रा ने कहा , ‘‘ हमने हाल ही में 9,000 से अधिक नियामकीय निर्देशों को समेकित कर 238 ‘मास्टर डायरेक्शन’ में बदला है। इसी तरह पर्यवेक्षण संबंधी निर्देशों का भी समेकन किया गया है।’’

आरबीआई ने कहा कि वह समय-समय पर निर्देशों की प्रासंगिकता का आकलन कर अनुपालन लागत कम करते हुए नियामकीय एवं पर्यवेक्षण ढांचे को मजबूत करने का प्रयास करता रहा है।

इसी उद्देश्य से 2025 में 9,000 से अधिक मौजूदा नियामकीय परिपत्रों तथा दिशानिर्देशों को 238 कार्य-आधारित ‘मास्टर डायरेक्शन’ में एकीकृत किया गया है।

इसी प्रकार पर्यवेक्षण संबंधी निर्देशों के लिए भी समेकन किया गया है और नौ कार्य क्षेत्रों से जुड़े 64 ‘मास्टर डायरेक्शन’ के मसौदे आज आरबीआई की वेबसाइट पर सार्वजनिक टिप्पणियों के लिए जारी किए गए हैं।

सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) के लिए कारोबार सुगमता बढ़ाने के उद्देश्य से मल्होत्रा ने कहा कि ‘ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम’ (टीआरईडीएस) मंच पर पंजीकरण के दौरान जांच-पड़ताल की अनिवार्यता समाप्त करने का प्रस्ताव है।

एमएसएमई को समय पर कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराने के लिए टीआरईडीएस से जुड़े दिशानिर्देश 2014 में जारी किए गए थे और 2018 में अद्यतन किए गए थे। 2023 में इसके दायरे का विस्तार कर बीमा कंपनियों को चौथे प्रतिभागी के रूप में शामिल किया गया।

एमएसएमई की अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने और कारोबार सुगमता बढ़ाने के लिए टीआरईडीएस मंचों पर शामिल होने के दौरान एमएसएमई के लिए जांच-पड़ताल की आवश्यकता को समाप्त करने का प्रस्ताव है।

उन्होंने कहा कि अन्य मौजूदा निर्देशों की भी व्यापक समीक्षा की गई है और संबंधित मसौदा निर्देश जल्द सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी किए जाएंगे।

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि ‘टर्म मनी मार्केट’ के और विकास के लिए इस बाजार खंड में कुछ अतिरिक्त गैर-बैंक संस्थाओं को भागीदारी की अनुमति देने का निर्णय लिया गया है।

उन्होंने कहा, ‘‘वर्तमान में इस बाजार में केवल बैंक और एकल प्राथमिक डीलर (एसपीडी) ही भाग लेने के पात्र हैं। हम इसमें एसपीडी की उधारी सीमा बढ़ाने का भी निर्णय ले रहे हैं।’’

उन्होंने कहा कि सक्रिय ‘टर्म मनी मार्केट’ बाजार प्रतिभागियों को वैकल्पिक वित्तपोषण का माध्यम उपलब्ध कराने के साथ-साथ मौद्रिक नीति के प्रभावी प्रसार को भी मजबूत करता है, क्योंकि यह ‘ओवरनाइट मनी मार्केट’ और दीर्घकालिक ब्याज दरों के बीच संबंध स्थापित करता है।

फिलहाल कुछ सावधानीपूर्ण सीमाओं के साथ इस बाजार में केवल बैंक और एकल प्राथमिक डीलर ही भाग ले सकते हैं।

आरबीआई ने कहा, ‘‘ ‘टर्म मनी मार्केट खंड’ में भागीदारी और नकदी बढ़ाने के उद्देश्य से इसमें अखिल भारतीय वित्तीय संस्थान (एआईएफआई), गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी), आवास वित्त कंपनियां और अन्य कंपनियों जैसे गैर-बैंक प्रतिभागियों को शामिल करने का निर्णय लिया गया है।’’

संशोधित दिशानिर्देश अलग से जारी किए जाएंगे।

भाषा निहारिका अजय

अजय