मुंबई, छह फरवरी (भाषा) देश के शीर्ष बैंक अधिकारियों ने शुक्रवार को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के नीतिगत दरों को स्थिर रखने को उम्मीद के अनुरूप फैसला बताने के साथ ही गवर्नर संजय मल्होत्रा द्वारा घोषित नियामकीय एवं विकासात्मक नीतियों का स्वागत किया।
भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के चेयरमैन और बैंकों के निकाय भारतीय बैंक संघ (आईबीए) के प्रमुख सी एस शेट्टी ने कहा कि नीतिगत दरों पर यथास्थिति की व्यापक रूप से उम्मीद की जा रही थी।
उन्होंने कहा कि उन्नत ग्राहक सुरक्षा और डिजिटल भुगतान सुरक्षा उपायों सहित प्रस्तावित सुधार, लीड बैंक योजना की समीक्षा और किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) ढांचे के पुनर्गठन से प्रणाली को मदद मिलेगी।
सार्वजनिक क्षेत्र के इंडियन बैंक के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) बिनोद कुमार ने कहा कि गवर्नर का एहतियाती और सक्रिय नकदी प्रबंधन पर जोर देना एक सकारात्मक कदम है और इससे ऋण प्रवाह को बनाए रखने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा, ‘‘लघु एवं मध्यम उद्यमों को बढ़ावा देने, वित्तीय समावेश, कर्ज वसूली और डिजिटल भुगतान की पहल से अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, वहीं प्रस्तावित धोखाधड़ी नियंत्रण रूपरेखा…और बैंकिंग प्रणाली में शिकायत निवारण पर ध्यान केंद्रित करने से ग्राहकों का विश्वास और सेवा की गुणवत्ता बढ़ेगी।’’
इंडियन ओवरसीज बैंक के प्रबंध निदेशक और सीईओ अजय कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि तटस्थ रुख जारी रखते हुए नीतिगत दर को बनाए रखने का निर्णय बदलती वैश्विक और घरेलू स्थितियों के बीच एक संतुलित दृष्टिकोण को दर्शाता है।
उन्होंने कहा, ‘‘भारत की वृद्धि के दृष्टिकोण में केंद्रीय बैंक का विश्वास घरेलू मांग की मजबूती और हाल के नीतिगत उपायों की प्रभावशीलता को रेखांकित करता है। ग्राहक संरक्षण, बेहतर नकदी प्रबंधन और एमएसएमई को ऋण प्रवाह बढ़ाने के साथ-साथ वित्तीय बाजारों को गहरा करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक का वित्तीय परिवेश को मजबूत करने पर निरंतर जोर देना स्वागत योग्य है।’’
स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक के भारत और दक्षिण एशिया के सीईओ पी डी सिंह ने कहा कि एमएसएमई के लिए ऋण सीमा में वृद्धि, एनबीएफसी और आरईआईटी (बैंक वित्तपोषण के माध्यम से) को समर्थन और कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार के विकास के माध्यम से वित्तीय समावेशन बढ़ाने पर जोर देने जैसे उपाय बाजार को मजबूत करेंगे।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने चालू वित्त वर्ष की छठी और अंतिम द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा में उम्मीद के मुताबिक नीतिगत दर रेपो को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखा।
आरबीएल बैंक की मुख्य अर्थशास्त्री अनीता रंगन ने कहा, ‘‘उम्मीद के मुताबिक आरबीआई ने नीतिगत दर को यथावत रखा है…। मौद्रिक नीति समिति मुद्रास्फीति और जीडीपी के नए आंकड़ों का इंतजार करेगी और अप्रैल में संशोधित पूर्वानुमान जारी करेगी।’’
उन्होंने कहा कि आर्थिक वृद्धि मजबूत बनी हुई है और महंगाई चार से पांच प्रतिशत के दायरे में आने की संभावना है। हालांकि वैश्विक अनिश्चितताओं को लेकर जोखिम बना हुआ है, जिसको लेकर केंद्रीय बैंक सतर्क है।
बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा कि रेपो दर में यथास्थिति उम्मीद के मुताबिक है और इसलिए बाजार पर इसका कोई बड़ा असर नहीं पड़ा।
उन्होंने कहा, ‘‘आरबीआई ने नकदी आपूर्ति का भरोसा दिया है, लेकिन कदम आवश्यकता के अनुसार उठाए जाएंगे। साथ ही बजट के अनुरूप बिना गारंटी वाले एमएसएमई ऋण की सीमा बढ़ाकर 20 लाख रुपये किया जाना छोटे कारोबारियों के लिए राहत भरा कदम है।’’
श्रीराम फाइनेंस के कार्यकारी वाइस चेयरमैन उमेश रेवणकर ने कहा कि मजबूत घरेलू वृद्धि और बैंकों तथा एनबीएफसी दोनों से स्वस्थ ऋण विस्तार के बीच एमपीसी का फैसला उचित है।
रेवणकर के अनुसार, आरबीआई गवर्नर के बयान से पता चलता है कि इस वर्ष बैंक और गैर-बैंक स्रोतों से वाणिज्यिक क्षेत्रों को ऋण प्रवाह 23.3 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर इस साल अबतक 29.6 लाख करोड़ रुपये हो गया है। यह बैंक ऋण के साथ-साथ बाजार-आधारित वित्त की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करता है।
उन्होंने यह भी कहा कि गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) से जुड़े नियामकीय सुधार ऋण वितरण को आसान बनाएंगे और छोटे व्यवसायों तक वित्त की पहुंच बढ़ेगी।
भाषा पाण्डेय प्रेम
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