भारतीय कंपनियों की राजस्व वृद्धि दूसरी तिमाही में घटकर 13-15 प्रतिशत रहने का अनुमानः इक्रा

Ads

भारतीय कंपनियों की राजस्व वृद्धि दूसरी तिमाही में घटकर 13-15 प्रतिशत रहने का अनुमानः इक्रा

  •  
  • Publish Date - August 27, 2026 / 05:03 PM IST,
    Updated On - August 27, 2026 / 05:03 PM IST

मुंबई, 27 अगस्त (भाषा) चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में भारतीय कंपनियों की राजस्व वृद्धि पहली तिमाही के 21.3 प्रतिशत से घटकर 13-15 प्रतिशत रह सकती है। इस दौरान कंपनियों का परिचालन लाभ मार्जिन भी एक प्रतिशत घटने का अनुमान है। रेटिंग एजेंसी इक्रा ने बृहस्पतिवार को यह बात कही।

इक्रा रेटिंग्स के समूह प्रमुख (कॉरपोरेट रेटिंग्स) जितिन मक्कड़ ने कहा कि जुलाई-सितंबर तिमाही में कमजोर वैश्विक मांग से निर्यात आधारित क्षेत्रों का प्रदर्शन प्रभावित हो सकता है, जबकि घरेलू मांग अपेक्षाकृत मजबूत बनी हुई है।

उन्होंने कहा कि वाहन, खुदरा, टिकाऊ उपभोक्ता वस्तु और आतिथ्य जैसे क्षेत्र घरेलू खपत पर निर्भर होने के कारण सूचना प्रौद्योगिकी, परिधान एवं घरेलू वस्त्र तथा तराशे गए हीरों जैसे निर्यात-आधारित क्षेत्रों की तुलना में बेहतर राजस्व वृद्धि दर्ज कर सकते हैं।

मक्कड़ ने कहा कि अगस्त-सितंबर में सामान्य से कम बारिश का अनुमान कृषि उत्पादन और ग्रामीण खपत के लिए जोखिम पैदा कर सकता है। इससे दूसरी तिमाही में खाद्य मुद्रास्फीति बढ़ने की आशंका है, जिसका असर ग्रामीण मांग पर निर्भर और कृषि-आधारित क्षेत्रों की आय वृद्धि तथा मार्जिन पर पड़ सकता है।

इक्रा ने कहा कि कच्चे माल, ईंधन, माल ढुलाई और पैकेजिंग की ऊंची लागत से भारतीय कंपनियों के परिचालन लाभ मार्जिन पर दबाव बना रहेगा। दूसरी तिमाही में यह एक साल पहले की समान अवधि की तुलना में 1-1.5 प्रतिशत तक घट सकता है।

मक्कड़ ने कहा कि दूसरी तिमाही में कंपनियों के मुनाफे के परिदृश्य में अप्रैल-जून तिमाही की तरह राजस्व वृद्धि और परिचालन लाभ मार्जिन के बीच अंतर देखने को मिल सकता है।

रेटिंग एजेंसी ने कहा कि तेलशोधन कंपनियों के मार्जिन पर पेट्रोलियम उत्पादों से कम वसूली और विपणन मार्जिन घटने के कारण दबाव बना रहेगा। विमानन, वाहन, एफएमसीजी और सीमेंट जैसे ऊर्जा-गहन क्षेत्रों पर कच्चे तेल और उससे जुड़े उत्पादों, पाम तेल तथा कोयले की ऊंची कीमतों का असर पड़ सकता है। इससे माल ढुलाई और पैकेजिंग सामग्री की लागत भी बढ़ेगी।

हालांकि, इन क्षेत्रों की अधिकांश कंपनियां पश्चिम एशिया संघर्ष और डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट से बढ़ी लागत को कीमतों में बढ़ोतरी के जरिये ग्राहकों पर डालने के प्रयास कर रही हैं।

इक्रा ने कहा कि धातु एवं खनन, तेल एवं गैस उत्पादन, दूरसंचार और कुछ उपयोगिता कंपनियां अनुकूल कीमतों, परिचालन क्षमता के बेहतर इस्तेमाल या बढ़ी लागत का बोझ ग्राहकों पर डालने के कारण अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में हैं।

रेटिंग एजेंसी ने कहा कि मार्जिन पर दबाव के बावजूद भारतीय कंपनी जगत की ऋण संबंधी स्थिति मजबूत बनी रहने की संभावना है।

भाषा प्रेम प्रेम अजय

अजय