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चावल उद्योग के पास अनाज से आगे बढ़कर कमाई का मौका, अगले महीने बीआईआरसी-2026 का आयोजन

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चावल उद्योग के पास अनाज से आगे बढ़कर कमाई का मौका, अगले महीने बीआईआरसी-2026 का आयोजन
Bhasha
Published: 30 Sept 2026 | 7:19 pmModified: 30 Sept 2026 | 7:19 pm

नयी दिल्ली, 30 सितंबर (भाषा) भारत का चावल उद्योग कच्चे अनाज के निर्यात से आगे बढ़कर चावल से बने नूडल्स, खाद्य तेल, प्रोटीन, खास तरह की सामग्री और औद्योगिक सामग्री के बढ़ते बाजार का फायदा उठाने की कोशिश कर रहा है। एक नए औद्योगिक आकलन में ऐसे मूल्यवर्धित उत्पादों की पहचान की जाएगी जिनसे सबसे बड़े वाणिज्यिक मौके मिल सकते हैं।

अगले महीने (23-25 ​​अक्टूबर) नयी दिल्ली में होने वाले 'भारत अंतरराष्ट्रीय चावल सम्मेलन (बीआईआरसी) 2026' में ‘‘कच्चे चावल से आगे: अगली अरबों डॉलर की कमाई का मौका’’ शीर्षक सत्र में इन संभावनाओं पर चर्चा की जाएगी।

आयोजकों ने एक बयान में कहा कि यह सत्र आईआरईएफ-ईवाई के उस आकलन के साथ खत्म होगा जिसमें ऐसे उत्पादों की पहचान की जाएगी जो बाजार की मांग, मार्जिन, निवेश की जरूरत और निर्यात की संभावनाओं का सबसे अच्छा संयोजन पेश करते हैं।

'ग्रैंड व्यू रिसर्च' के अनुसार, यह पहल ऐसे समय में की जा रही है जब चावल से बने कई उत्पादों के लिए वैश्विक बाजार बढ़ रहा है। वैश्विक चावल-नूडल बाजार के वर्ष 2024 में 6.4 अरब डॉलर से बढ़कर 2030 तक 11 अरब डॉलर होने का अनुमान है, जबकि चावल भूसी तेल बाजार के वर्ष 2023 के 4.8 अरब डॉलर से बढ़कर 2030 तक 6.3 अरब डॉलर होने का अनुमान है।

भारत के पास चावल भूसी तेल के उत्पादन को बढ़ाने की भी काफी गुंजाइश है। नीति आयोग की 2024 की एक रिपोर्ट में संभावित उत्पादन का अनुमान 19 लाख टन लगाया गया था, जिसमें लगभग 8,50,000 टन की ऐसी क्षमता शामिल है जिसका अभी इस्तेमाल नहीं हुआ है।

'ग्रैंड व्यू रिसर्च' के अनुसार, वैश्विक चावल-प्रोटीन बाजार के वर्ष 2023 के 16.85 करोड़ डॉलर से बढ़कर 2030 तक 28.14 करोड़ डॉलर होने का अनुमान है।

सम्मेलन में चावल के आटे और ‘फंक्शनल स्टार्च’ के साथ-साथ चावल प्रोटीन पर भी चर्चा की जाएगी, जिसमें प्रसंस्करण की जरूरतों, ग्राहकों की जरूरतों और वाणिज्यिक रूप से फायदेमंद उत्पादन पर ध्यान दिया जाएगा।

ये मौके सिर्फ खाने-पीने की चीजों तक ही सीमित नहीं हैं। ग्रैंड व्यू रिसर्च के अनुसार, चावल की भूसी की राख से बनने वाले सिलिका का वैश्विक बाजार वर्ष 2025 के लगभग 64.06 करोड़ डॉलर से बढ़कर वर्ष 2033 तक 1.41 अरब डॉलर से ज्यादा होने का अनुमान है। वर्ष 2025 में इस बाजार की कमाई में रबड़ और टायर का हिस्सा लगभग 40 प्रतिशत था।

गुडइयर ने वर्ष 2025 में घोषणा की कि वह अपने यूरोपीय ट्रक-रेसिंग टायरों में चावल की भूसी की बेकार राख से बनी सिलिका का इस्तेमाल कर रही है।

भाषा राजेश राजेश अजय

अजय

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