नयी दिल्ली, 15 जुलाई (भाषा) केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को देश में सेमीकंडक्टर परिवेश को मजबूत बनाने, मोबाइल फोन का उत्पादन बढ़ाने और वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण केंद्र के तौर पर स्थिति मजबूत करने के लिए लगभग 1.9 लाख करोड़ रुपये के व्यय वाली दो बड़े विनिर्माण कार्यक्रमों को मंजूरी दी।
सरकार ने सेमीकंडक्टर डिजाइन और विनिर्माण क्षमता को बढ़ाने के लिए 1.27 लाख करोड़ रुपये के ‘सेमीकॉन 2.0’ कार्यक्रम को मंजूरी दी है। इसके साथ ही, मोबाइल फोन का घरेलू उत्पादन बढ़ाने, निर्यात को बढ़ावा देने और स्थानीय मूल्य सृजन को मजूबूत करने के मकसद से 62,500 करोड़ रुपये की ‘मोबाइल फोन विनिर्माण’ योजना को भी मंजूरी दी गई है।
सेमीकंडक्टर कार्यक्रम ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन’ के पहले चरण पर आधारित है। यह छह मुख्य क्षेत्रों… चिप डिजाइन, सेमीकंडक्टर उपकरण और सामग्री, फैब्रिकेशन सुविधाएं, अत्याधुनिक पैकेजिंग और परीक्षण, शोध और विकास तथा प्रतिभा विकास पर ध्यान देगा।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘इस कार्यक्रम के अंत तक हम स्वदेशी चिप के उत्पादन में आत्मनिर्भर हो जाएंगे।’’
सरकार को उम्मीद है कि नई योजना से लगभग चार लाख करोड़ रुपये का निवेश आएगा और योजना अवधि के दौरान दो लाख करोड़ रुपये मूल्य का सेमीकंडक्टर उत्पादन होगा।
वैष्णव ने कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 62,500 करोड़ रुपये की ‘मोबाइल फोन विनिर्माण योजना’ को भी मंजूरी दी है। इसके तहत वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक यानी पांच वर्षों के लिए विनिर्माताओं को उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) दिए जाएंगे।
पात्र मोबाइल फोन की बिक्री पर प्रोत्साहन 2.25 प्रतिशत से पांच प्रतिशत तक होंगे। साथ ही मुख्य कलपुर्जे की घरेलू खरीद और उत्पाद डिजाइन और शोध में निवेश करने वाली भारतीय कंपनियों के लिए अतिरिक्त सहायता भी दी जाएगी।
सरकार को उम्मीद है कि मोबाइल फोन योजना से योजना अवधि के दौरान लगभग 39 लाख करोड़ रुपये का कुल उत्पादन होगा, निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और लगभग 60,000 प्रत्यक्ष नौकरियां सृजित होंगी।
भारत मोबाइल फोन विनिर्माण के मामले में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश बन गया है। अब देश में उपयोग होने वाले 99.2 प्रतिशत मोबाइल फोन यहीं बनते हैं। 2025 में मोबाइल फोन भारत का सबसे अधिक निर्यात होने वाला उत्पाद बन गया। इसने डीजल और तराशे हुए हीरों जैसे पारंपरिक निर्यात वस्तुओं को पीछे छोड़ दिया।
सेमीकॉन 2.0 का मकसद सेमीकंडक्टर बौद्धिक संपदा, वाणिज्यिक और रणनीतिक चिप डिजाइन और विभिन्न क्षेत्रों में जरूरी महत्वपूर्ण कलपुर्जे बनाने की क्षमता को बढ़ावा देना है। यह कार्यक्रम सेमीकंडक्टर मशीनरी, सामग्री, रसायन और गैस बनाने वाली कंपनियों को मदद देगा और साथ ही भारत में और फैब्रिकेशन संयंत्र लाने की कोशिश करेगा।
मंत्रिमंडल बैठक के बाद जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि इस पहल से आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होगी और भारत को सेमीकंडक्टर डिजाइन और विनिर्माण के प्रमुख केंद्र के तौर पर स्थापित करने में मदद मिलेगी। उम्मीद है कि देश की पहली सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन इकाई 2028 में काम करना शुरू कर देगी।
इस कार्यक्रम का मकसद असेंबली, परीक्षण, मार्किंग और पैकेजिंग और आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट क्षमताओं को बढ़ाना और साथ ही अत्याधुनिक चिप प्रौद्योगिकी पर शोध को आगे बढ़ाना भी है।
भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र पर जोर देने से 12 विनिर्माण परियोजनाओं को मंजूरी मिल चुकी है। इन परियोजनाओं में कुल मिलाकर 1.64 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश होगा।
सरकार ने कहा कि 2014-15 के बाद से इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में काफी वृद्धि हुई है। उत्पादन सात गुना और निर्यात 11 गुना बढ़ गया है। इसमें ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत मोबाइल फोन विनिर्माण का बड़ा योगदान है।
सेमीकंडक्टर और मोबाइल विनिर्माण के ये कार्यक्रम भारत की उस बड़ी रणनीति का हिस्सा हैं, जिसका मकसद प्रमुख प्रौद्योगिकी में घरेलू क्षमताएं बनाना, आयात पर निर्भरता कम करना और वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक आपूर्ति श्रृंखला में मजबूती के साथ एकीकृत होना है।
भाषा रमण अजय
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