मुंबई, 15 जुलाई (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक ने बुधवार को प्रस्ताव किया कि उसके नियमन के दायरे में आने वाले बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों और दूसरी संस्थाओं को अपनी जोखिम प्रबंधन रूपरेखा के तहत आंकड़ों से जुड़े जोखिम को प्रबंधित करने के लिए कदम उठाने चाहिए।
केंद्रीय बैंक ने आंकड़ों के रखरखाव, भूमिकाओं, ढांचा, आंकड़ों से जुड़ी जानकारी, गुणवत्ता और आंकड़े साझा करने से संबंधित तीसरे पक्ष की व्यवस्था के बारे में दिशानिर्देश का मसौदा जारी किया है।
वित्तीय क्षेत्र में बढ़ते डिजिटलीकरण और प्रौद्योगिकी आधारित व्यापार मॉडल को अपनाने के साथ, आंकड़े बैंक और एनबीएफसी के लिए एक जरूरी परिसंपत्ति बन गये हैं।
आरबीआई ने नियमों के मसौदे में कहा कि जैसे-जैसे आंकड़े की मात्रा, विविधता और गति बढ़ती जा रही है, ऐसे में यह जरूरी है कि आंकड़ें सभी प्रणाली में सही, एक जैसा, सुरक्षित और काम के लायक बना रहे। इसके लिए प्रभावी आंकड़ा रखरखाव व्यवस्था जरूरी हो गयी है।
केंद्रीय बैंक ने कहा कि आंकड़ों के रखरखाव और इसके प्रबंधन में कमियों से बैंक और एनबीएफसी के लिए बड़े वित्तीय, परिचालन, अनुपालन और साख को लेकर जोखिम पैदा हो सकते हैं।
दिशानिर्देशों के मसौदे में कहा गया, ‘‘बैंक, एनबीएफसी को कुल मिलाकर अपने जोखिम प्रबंधन रूपरेखा के हिस्से के तौर पर आंकड़ा जोखिम को प्रबंधित करने के लिए कदम उठाने चाहिए।’’
इसमें आंकड़ों से जुड़े जोखिमों की पहचान, आकलन, निगरानी और प्रबंधन के लिए आंकड़ों की विशेषता, आंकड़ा स्रोत (बाहरी और आंतरिक), आंकड़ा गुणवत्ता, आंकड़ा वर्गीकरण और बड़े आंकड़ों के नजरिये की पहचान शामिल होनी चाहिए।
मसौदे में यह भी प्रस्ताव है कि बैंकों और एनबीएफसी को कार्यकारी स्तर की आंकड़ा रखरखाव समिति बनानी चाहिए या यह जिम्मेदारी किसी मौजूदा कार्यकारी समिति को सौंपनी चाहिए।
बैंक, एनबीएफसी के निदेशक मंडल को आंकड़ा रखरखाव रूपरेखा (डीजीएफ) की देखरेख करनी चाहिए और उसके सामने रखी गई रिपोर्ट की समीक्षा करनी चाहिए।
साथ ही, डीजीएफ की समीक्षा सालाना या जरूरत के हिसाब से उससे अधिक बार की जानी चाहिए।
रिजर्व बैंक ने दिशानिर्देशों मसौदे पर 17 अगस्त तक संबंधित पक्षों से टिप्पणियां मांगी है।
भाषा रमण अजय
अजय