नयी दिल्ली, 29 जनवरी (भाषा) भारत की नवीकरणीय ऊर्जा की गति को बनाए रखने के लिए उच्च पूंजी लागत, भूमि अधिग्रहण में देरी और ग्रिड उपलब्धता जैसी चुनौतियों को सुलझाना जरूरी है। इसके लिए नए वित्तपोषण मॉडल और परियोजना निष्पादन में सुधार जैसे उपाय अपनाने होंगे।
समीक्षा में कहा गया कि सौर पैनलों में उपयोग होने वाले चांदी की कीमतें बढ़ती रहेंगी, क्योंकि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच यह निवेशकों के लिए सुरक्षित विकल्प बनी हुई है।
भारत की ऊर्जा संरचना में बड़े बदलाव देखे जा रहे हैं। देश कुल नवीकरणीय ऊर्जा और स्थापित सौर क्षमता में तीसरे, जबकि पवन ऊर्जा क्षमता में चौथे स्थान पर है। दिसंबर 2025 तक भारत ने गैर-जीवाश्म स्रोतों से बिजली उत्पादन क्षमता का 50 प्रतिशत का लक्ष्य पार कर लिया है, जो 51.93 प्रतिशत पर पहुंच चुका है।
वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान (31 दिसंबर तक) देश में कुल 38.61 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता स्थापित की गई, जिसमें 30.16 गीगावाट सौर, 4.47 गीगावाट पवन, 0.03 गीगावाट बायो-पावर और 3.24 गीगावाट जल विद्युत शामिल हैं।
समीक्षा में कहा गया कि भारत में नवीकरणीय ऊर्जा की गति बनाए रखने के लिए उच्च पूंजी लागत, भूमि अधिग्रहण में देरी और ग्रिड उपलब्धता जैसी चुनौतियों का समाधान उपयुक्त साधनों के माध्यम से करना आवश्यक है।
भाषा योगेश पाण्डेय
पाण्डेय