नयी दिल्ली, 29 जनवरी (भाषा) आर्थिक समीक्षा 2025-26 ने भारत की वृद्धि का शक्तिशाली संदेश दिया है, क्योंकि इसमें वैश्विक आर्थिक ढांचे के विखंडन और आपूर्ति श्रृंखला के पुनर्गठन के बीच वृद्धि की प्राथमिकताओं को रेखांकित किया गया है। विशेषज्ञों ने बृहस्पतिवार को यह बात कही।
समीक्षा में अप्रैल से शुरू होने वाले वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक वृद्धि 6.8-7.2 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है।
केपीएमजी इंडिया के दिल्ली-एनसीआर के कार्यालय प्रबंध साझेदार नवीन अग्रवाल ने कहा, ”आर्थिक समीक्षा 2025-2026 एक सशक्त संदेश देती है, जबकि वैश्विक अर्थव्यवस्था भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति श्रृंखला के पुनर्गठन के तहत विखंडित हो रही है, भारत की गति बढ़ रही है।”
क्रिसिल की मुख्य अर्थशास्त्री दीप्ति देशपांडे ने कहा कि 2025-26 की समीक्षा वैश्विक अनिश्चितता बढ़ने के बावजूद बेहतर वृद्धि संभावनाओं की बात करती है।
इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च (इंड-रा) ने कहा कि समीक्षा ने न केवल भारतीय अर्थव्यवस्था की ताकत और कमजोरियों का उचित आकलन किया है, बल्कि उच्च वृद्धि को बनाए रखने के लिए सुझाव भी दिए हैं।
एलएंडटी फाइनेंस की मुख्य अर्थशास्त्री रजनी ठाकुर ने कहा कि बजट-पूर्व दस्तावेज ने मजबूत घरेलू वृद्धि की कहानी, बढ़ती वित्तीय संवेदनशीलता और नाजुक वैश्विक स्थितियों के बीच संतुलन बनाया है।
ईवाई इंडिया के मुख्य नीति सलाहकार डी के श्रीवास्तव ने कहा कि कुल मिलाकर आर्थिक समीक्षा वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत सेहत की तस्वीर पेश करती है।
भाषा पाण्डेय
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