कोलकाता, 17 जनवरी (भाषा) भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने कोलकाता में अपनी वैश्विक बाजार इकाई (जीएमयू) के परिसर का पट्टा समाप्त कर दिया है। बैंक के इस कदम का एक नागरिक मंच ने कड़ा विरोध किया है और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से हस्तक्षेप कर बिना नियामक मंजूरी के इस इकाई को बंद होने से रोकने का आग्रह किया है।
एक वेंडर को जारी 14 जनवरी, 2026 के एसबीआई के नोटिस के अनुसार, बैंक मध्य कोलकाता के जवाहरलाल नेहरू रोड स्थित ‘जीवन सुधा’ बिल्डिंग की 11वीं से 16वीं मंजिल का पट्टा समाप्त कर रहा है। इसी परिसर में बैंक की विदेशी मुद्रा और वैश्विक बाजार इकाई स्थित थी।
नोटिस में परिसर खाली करने के लिए एक महीने का समय दिया गया है। यह कदम बैंक की अपने ट्रेजरी और विदेशी मुद्रा परिचालन को मुंबई स्थानांतरित कर वहां से संचालित करने की योजना का हिस्सा है।
एसबीआई अब तक ‘जीवन सुधा’ बिल्डिंग से ही अपनी जीएमयू और कुछ अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग गतिविधियों का संचालन करता आ रहा है।
बैंक की अपनी विशाल इमारत ‘समृद्धि भवन’ हुगली नदी के तट पर ‘1, स्ट्रैंड रोड’ पर स्थित है। यह भवन एसबीआई के कई महत्वपूर्ण विभागों का प्रमुख केंद्र है, जिसमें स्टेट बैंक अभिलेखागार और संग्रहालय भी शामिल है। यहां खुदरा बैंकिंग से लेकर अन्य विशिष्ट सेवाएं प्रदान की जाती हैं और साथ ही यहां बैंक का एक बड़ा क्षेत्रीय कार्यालय भी संचालित होता है।
नागरिक मंच ‘बैंक बचाओ देश बचाओ मंच’ (बीबीडीबीएम) ने कहा कि एसबीआई ने इमारत के मालिक ‘भारतीय जीवन बीमा निगम’ (एलआईसी) को परिसर खाली करने के अपने इरादे के बारे में पहले ही सूचित कर दिया है।
मंच के अनुसार, यह दर्शाता है कि प्रशासनिक स्तर पर कोलकाता जीएमयू को बंद करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
बीबीडीबीएम ने जनवरी के दूसरे सप्ताह में आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा को भेजे एक प्रतिवेदन में भारतीय रिजर्व बैंक से आग्रह किया था कि वह कोलकाता जीएमयू का बैंकिंग लाइसेंस लौटाने की अनुमति न दें। मंच ने कहा कि स्पष्ट नियामक मंजूरी के बिना किसी भी तरह का बंद होना आरबीआई के वैधानिक अधिकार का उल्लंघन होगा।
जीएमयू और केंद्रीय वैश्विक बैक ऑफिस (सीजीबीओ) की स्थापना 2015 में की गई थी। यह इकाई लंदन, हांगकांग और न्यूयॉर्क जैसे विदेशी केंद्रों के लिए प्रमुख बैक-ऑफिस परिचालन संभालती रही है।
बीबीडीबीएम के संयुक्त संयोजक सौम्य दत्ता ने कहा कि इस इकाई ने पूर्वी भारत से अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग गतिविधियों को सुगम बनाकर और रोजगार पैदा कर पश्चिम बंगाल के आर्थिक पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि इसे बंद करने से कोलकाता की पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत के लिए एक ‘वित्तीय प्रवेश द्वार’ के रूप में भूमिका कमजोर हो सकती है।
भाषा सुमित पाण्डेय
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