एफपीओ मामले में प्रवर्तकों के नयूनतम योगदान नियम को समाप्त करने संबंधी प्रस्ताव को सेबी की मंजूरी

Ads

एफपीओ मामले में प्रवर्तकों के नयूनतम योगदान नियम को समाप्त करने संबंधी प्रस्ताव को सेबी की मंजूरी

  •  
  • Publish Date - December 16, 2020 / 04:09 PM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:49 PM IST

नयी दिल्ली, 16 दिसंबर (भाषा) पूंजी बाजार नियामक सेबी ने बुधवार को अनुवर्ती सार्वजनिक पेशकश (एफपीओ) के मामले में प्रवर्तकों को कुछ शर्तों के साथ राहत देने का फैसला किय है। एफपीओ में प्रवर्तकों के नयूनतम योगदान के नियम को समाप्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के निदेशक मंडल की बुधवार को हुई बैठक में एफपीओ में प्रवर्तक की नयूनतम भागीदारी और जारीकर्ता के लिये आगे शेयर को एक न्यूनतम अवधि तक अपने पास रखने ( लॉक-इन ) की जरूरतों को समाप्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। सेबी के जारी एक वक्तव्य में यह कहा गया है।

मौजूदा नियमों के मुताबिक एफपीओ जारी करते समय कंपनी के प्रवर्तकों को उसमें 20 प्रतिशत का योगदान करना होता है। इसके साथ ही सार्वजनिक तौर पर पूंजी जारी करने के मामले में प्रवर्तकों का जो न्यूनतम योगदान होता है उसपर तीन साल के लिये खरीद- फरोख्त से रोक होती है।

नियामक ने कहा है कि यह राहत उन कंपनियों को उपलब्ध होगी जिनके शेयरों में कम से कम तीन साल के दौरान शेयर बाजार में खुले तौर पर खरीद फरोख्त होती रही है। इसके साथ ही एक और शर्त यह भी रखी गई है कि इन कंपनियों ने निवेशकों की 95 प्रतिशत शिकायतों का निपटारा किया हो।

एफपीओ जारी करने वाली कंपनी कम से कम तीन साल तक शेयर बाजार में सूचीबद्धता दायित्व और खुलासा आवश्यकता नियम के मामले में पूरी तरह से अनुपालन में रही हो।

सेबी निदेशक मंडल ने इसके साथ ही वैकल्पिक निवेश कोषों (एआईएफ) को निवेश समिति सदस्यों के मामले में कुछ रियायतें देने का भी फैसला किया है। सेबी ने कहा है, इसके साथ यह शर्त भी जुड़ी है कि प्रत्येक निवेशक की ओर से कम से कम 70 करोड़ रुपये की पूंजी प्रतिबद्धता होनी चाहिये जो कि उपयुक्त राहत के साथ होगी।’’

सेबी निदेशकमंडल ने शेयर कारोबार में मध्यस्थों का संचालन करने वाले नियमों में संशोधन को भी मंजूरी दी है। सक्षम प्राधिकरण और सदस्य के समक्ष प्रक्रियाओं के दोहराव से बचने के संदर्भ में यह संशोधन किये गये हैं।

निदेशक मंडल ने केन्द्रीय डेटाबस के नियमों को निरस्त करने का भी फैसला किया है। सेबी ने कहा है कि प्रतिभूति बाजार से जुड़े सभी तरह के लेनदेन के मामले में स्थायी खाता संख्या (पैन) को ही पहचान की एकमात्र पहचान संख्या मान लिये जाने और केन्द्रीय डेटा बेस नियमों के तहत जारी विशिष्ट पहचान संख्या की आवश्यकता को समाप्त कर दिये जाने के बाद इस तरह के नियम अनावश्यक हो गये हैं।

भाषा

महाबीर मनोहर

मनोहर