नयी दिल्ली, पांच मार्च (भाषा) भारत ने ऊर्जा आपूर्ति की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए पश्चिम एशिया से तेल लेकर जाने वाले जहाजों को समुद्री जोखिम कवर उपलब्ध कराने के लिए अमेरिका से संपर्क साधा है। पेट्रोलियम मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
अधिकारी ने कहा कि भारत के पास टैंकर, पाइपलाइन और समुद्री रास्ते में मौजूद जहाजों को मिलाकर करीब 25 दिन की जरूरत लायक कच्चा तेल और उतने ही दिन का तैयार ईंधन भंडार उपलब्ध है।
कच्चे तेल का इस्तेमाल पेट्रोल और डीजल जैसे ईंधन के उत्पादन में होता है।
पश्चिम एशिया में जारी सैन्य संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते टैंकर की आवाजाही प्रभावित हुई है। यह संकीर्ण समुद्री मार्ग वैश्विक तेल और एलएनजी व्यापार का एक बड़ा हिस्सा संभालता है।
भारत अपनी लगभग 88 प्रतिशत कच्चे तेल की जरूरत आयात के जरिये पूरी करता है, जबकि करीब आधा एलएनजी भी बाहर से मंगाया जाता है।
अधिकारी ने कहा, ‘‘सरकार अमेरिका स्थित अंतरराष्ट्रीय विकास वित्त निगम (आईडीएफसी) से होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों के लिए राजनीतिक जोखिम बीमा और वित्तीय गारंटी हासिल करने को लेकर बातचीत कर रही है।’’
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आईडीएफसी को निर्देश दिया है कि वह पश्चिम एशिया में समुद्री व्यापार के लिए राजनीतिक जोखिम बीमा और वित्तीय गारंटी मुहैया कराए।
हालांकि, आईडीएफसी को इसके लिए पहले एक कोष स्थापित करना होगा। उसके बाद ही बीमा कवर उपलब्ध हो सकेगा और प्रीमियम का भुगतान संबंधित कारोबारी पक्ष करेगा।
अधिकारी ने कहा कि कच्चे तेल का अपना भंडार बढ़ाने के लिए सरकार रूस सहित सभी स्रोतों से तेल खरीदने की संभावनाएं तलाश रही है। इस संबंध में सोनात्राक, अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी के अलावा टोटलएनर्जीज, विटॉल और ट्राफिगुरा जैसे वैश्विक आपूर्तिकर्ताओं से बातचीत चल रही है।
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अमेरिका से कच्चे तेल एवं रसोई गैस का आयात बढ़ गया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने और कतर एनर्जी द्वारा गैस आपूर्ति रोक दिए जाने से भारत की एलएनजी आपूर्ति पर असर पड़ा है। इससे कुछ उद्योगों को गैस आपूर्ति घटानी पड़ी है।
अधिकारी ने कहा कि सरकार महत्वपूर्ण क्षेत्रों को प्राथमिकता देने के लिए गैस आवंटन नए सिरे से तय करने पर विचार कर सकती है।
भारत प्रतिदिन लगभग 19.5 करोड़ मानक घन मीटर गैस की खपत करता है, जिसका करीब आधा हिस्सा आयात से आता है।
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इस स्थिति पर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) और पेट्रोलियम निर्यातक देशों के समूह ओपेक के साथ भी चर्चा की है।
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