Rajya Sabha Election 2026 | Photo Credit: IBC24
रायपुर: Rajya Sabha Election 2026 गुरूवार 5 मार्च को राज्यसभा चुनावों के नामांकन की आखिरी तारीख पर नवा रायपुर के विधानसभा सचिवालय में बीजेपी और कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवारों ने नामांकन कर दिया है। 6 मार्च को नामांकन पत्रों की जांच के बाद, 9 मार्च तक कैंडिडेट नाम वापसी कर पाएंगे, उसी दिन प्रत्याशियों के नाम घोषित होंगे, और फिर 16 मार्च को मतदान के बाद शाम तक रिजल्ट घोषित कर दिए जाएंगे। अप्रत्यक्ष पद्धति वाले इस चुनाव में इस बार उच्च सदन में एक कांग्रेस और एक बीजेपी से सदस्य बनना तय है। अब सवाल ये है कि दिग्गजों की दावेदारी के बीच दोनों ही दलों ने महिलाओं पर दांव क्यों खेला है?
Rajya Sabha Election 2026 छत्तीसगढ़ से राज्यसभा की 2 खाली हो रही सीटों पर अब बीजेपी और कांग्रेस दोनों तरफ के उम्मीदवारों ने अपने-अपने पर्चे दाखिल कर दिये हैं। 5 मार्च गुरूवार को,बीजेपी उम्मीदवार लक्ष्मी वर्मा नामांकन भरा। साथ में CM विष्णुदेव साय, डिप्टी CM विजय शर्मा, बीजेपी अध्यक्ष किरण देव, केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू समेत बड़ी संख्या में बीजेपी नेता साथ मौजूद रहे। लक्ष्मी वर्मा 30 साल से राजनीति में सक्रिय हैं। पिछले 2 बार से टिकट दावेदारों में नाम चला लेकिन टिकट ना मिला, फिर आयोग-मंडल सूचि में भी स्थान ना मिला अब पार्टी ने सीधे राज्यसभा के लिए मैदान में उतार है फिलहाल वर्म राज्य महिला आयोग की सदस्य हैं। महिला, सशक्त और सक्रिय OBC फेस के तौर पर लक्ष्मी वर्मा की उम्मीदवारी पक्की रणनीति का हिस्सा है।
दूसरी तरफ कांग्रेस ने एक बार फिर मौजूदा राज्यसभा सांसद रहीं, फूलो देवी नेताम पर भरोसा किया। नेताम ने भी 5 मार्च को PCC चीफ दीपक बैज, नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत, कांग्रेसी विधायकों और वरिष्ठों की मौजूदगी में अपना नामांकन भर दिया है। खास बात ये कि इस बार कांग्रेस से पीसीसी चीफ, पूर्व CM, पूर्व डिप्टी CM जैसे दिग्गजों के नामों की चर्चा रही है लेकिन पार्टी ने राज्य महिला कांग्रेस अध्यक्ष नेताम पर ही भरोसा किया। जिस पर बीजेपी ने कांग्रेस पर तंज कसा।
कुल मिलाकर बीजेपी और कांग्रेस दोनों पार्टियों ने महिला नेत्रियों को राज्यसभा भेजने की तैयारी कर ली है। दोनों कैंडिडेट लंबे समय से पार्टी में सक्रीय हैं, अपने वर्ग और महिलाओं के अधिकारों पर मुखरता से बात रखती हैं। बड़ा सवाल ये कि दोनों तरफ से दिग्गज नेताओं की दावेदारी के बीच, पार्टियों ने इन्हें आगे कर क्या मैसेज दिया है? इसके बाद दावेदार नेताओं को संभाल पाना किस पक्ष में ज्यादा चुनौतीपूर्ण होगा और किस पक्ष के लिए ज्यादा फायदेमंद?