गैस सिलेंडर की किल्लत से रेस्तरां उद्योग की मुश्किलें बढ़ीं, व्यंजनों में कर रहे फेरबदल

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गैस सिलेंडर की किल्लत से रेस्तरां उद्योग की मुश्किलें बढ़ीं, व्यंजनों में कर रहे फेरबदल

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  • Publish Date - March 11, 2026 / 06:29 PM IST,
    Updated On - March 11, 2026 / 06:29 PM IST

नयी दिल्ली, 11 मार्च (भाषा) पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच एलपीजी आपूर्ति में अनियमितता के कारण दिल्ली के कई रेस्तरां ईंधन की कमी का सामना कर रहे हैं, जिससे परोसे जाने वाले व्यंजनों में फेरबदल, लागत बढ़ने और कर्मचारियों के वेतन को लेकर चिंता जैसी समस्याएं पैदा होने लगी हैं।

उद्योग प्रतिनिधियों ने कहा कि कई रेस्तरां फिलहाल वैकल्पिक इंतजामों के जरिये स्थिति संभालने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन व्यवधान लंबे समय तक जारी रहने पर छोटे प्रतिष्ठानों के लिए बढ़ती लागत को संभाल पाना मुश्किल हो सकता है।

सरकार ने पश्चिम एशिया संकट को देखते हुए घरेलू स्तर पर उत्पादित प्राकृतिक गैस की आपूर्ति को एलपीजी उत्पादन, सीएनजी और पाइप से मिलने वाली रसोई गैस को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है। गजट अधिसूचना के मुताबिक, इन क्षेत्रों की जरूरत पूरी होने के बाद ही अन्य उद्योगों को गैस दी जाएगी।

भारतीय राष्ट्रीय रेस्तरां एसोसिएशन (एनआरएआई) के मानद कोषाध्यक्ष मनप्रीत सिंह ने कहा कि दिल्ली के कई रेस्तरां को नियमित एलपीजी आपूर्ति नहीं हो पा रही है। इस स्थिति में कुछ प्रतिष्ठान पाइप से होने वाली रसोई गैस आपूर्ति और इंडक्शन कुकिंग जैसे विकल्प अपना रहे हैं।

उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में कई रेस्तरां ऐसे व्यंजन को बढ़ावा दे रहे हैं जिनमें कम गैस खपत होती है। इसके अलावा इंडक्शन उपकरणों के इस्तेमाल से बड़े पैमाने पर खाना पकाने का तरीका भी अपनाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि दिल्ली के शाहदरा स्थित उनके रेस्तरां ‘अर्बन कबाब’ में भी एलपीजी स्टॉक खत्म हो चुका है और अनियमित आपूर्ति के कारण रोजमर्रा के रसोई संचालन में कठिनाई हो रही है।

उन्होंने कहा कि यदि स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो परिचालन लागत कम करने के लिए कर्मचारियों के वेतन में कटौती या कुछ कर्मचारियों को हटाने जैसे कदम भी उठाने पड़ सकते हैं।

‘द पियानो मैन’ रेस्तरां शृंखला के संस्थापक अर्जुन सागर गुप्ता ने कहा कि उनके प्रतिष्ठानों को एलपीजी की आपूर्ति रुक गई है, जिसके कारण उन्हें पाइप से मिलने वाली प्राकृतिक गैस पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (आईजीएल) ने भी इस संबंध में परिपत्र जारी किया है और वे फिलहाल यह तय करने की कोशिश कर रहे हैं कि बिना गैस के कौन-कौन से व्यंजन बनाए जा सकते हैं।

‘दरियागंज रेस्तरां’ के सह-संस्थापक और एनआरएआई दिल्ली खंड के सह-प्रमुख अमित बग्गा ने कहा कि कई जगह एलपीजी सिलेंडर की कमी होने या उन्हें बाजार में अधिक कीमत पर बेचे जाने से कर्मचारियों की आजीविका पर भी असर पड़ सकता है।

हालांकि, कुछ प्रतिष्ठानों को अभी तक बड़ी समस्या का सामना नहीं करना पड़ा है। ‘कारीगरी वेंचर्स’ के प्रबंध निदेशक योगेश शर्मा ने कहा कि उनके अधिकांश दिल्ली स्थित रसोईघर आईजीएल की गैस पाइपलाइन से जुड़े हैं, जिससे ईंधन की आपूर्ति फिलहाल सामान्य बनी हुई है।

इस बीच, एलपीजी सिलेंडर पर काफी हद तक निर्भर रहने वाले रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को भी आपूर्ति प्रभावित होने से तमाम मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।

इंडियन हॉकर्स एसोसिएशन से संबद्ध संदीप ने कहा, “यदि सिलेंडर की कमी बनी रहती है तो कुछ विक्रेताओं को ऊंचे दाम पर काला बाजार से सिलेंडर खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। ऐसे में उनकी लागत बढ़ने से कमाई पर गंभीर असर पड़ सकता है।”

भाषा प्रेम प्रेम अजय

अजय