(Silver Price Crash/ Image Credit: Pixabay)
नई दिल्ली: Silver Price Crash: पिछले समय में चांदी की कीमतों ने निवेशकों को खुश कर दिया था, लेकिन अब विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि बाजार में गिरावट का दौर आ सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी ने 82.670 डॉलर प्रति औंस का रिकॉर्ड छुआ था, लेकिन सप्ताह की शुरुआत में यह 71.300 डॉलर तक लुढ़क गई। इस अचानक गिरावट ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय है मुनाफा बुक कर बाजार से बाहर निकलने का, क्योंकि आने वाले समय में कीमतें 60% तक गिर सकती हैं।
2025 में चांदी की कीमतों में करीब180% की वृद्धि देखी गई। इस तेजी के पीछे कई कारण थे। सैमसंग जैसी कंपनियों ने लिथियम-आयन बैटरी की जगह सॉलिड-स्टेट बैटरी अपनाई, जिससे चांदी की औद्योगिक मांग बढ़ी। पेरू और चाड से सप्लाई में रुकावट, अमेरिका-वेनेजुएला तनाव और चीन द्वारा 1 जनवरी 2026 से चांदी के निर्यात पर रोक ने भी कीमतों को बढ़ावा दिया।
महंगी चांदी के कारण उद्योग अब विकल्प तलाश रहे हैं। सोलर पैनल, फोटोवोल्टिक सेल और बैटरी सेक्टर में कंपनियों ने चांदी की जगह तांबे का उपयोग शुरू कर दिया है। इजराइल, ताइवान, ऑस्ट्रेलिया और चीन की कंपनियां इस बदलाव में तेजी से काम कर रही हैं। यह रुझान भविष्य में चांदी की मांग और कीमतों पर दबाव डाल सकता है।
1980 में हंट ब्रदर्स के समय चांदी 49.5 डॉलर से 11 डॉलर तक गिर गई थी। 2011 में भी 48 डॉलर से लगभग 75% गिरावट दर्ज हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा तेजी भी अल्पकालिक है और निवेशकों को सावधानी से निवेश करना चाहिए।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि फरवरी 2026 तक चांदी 100 डॉलर प्रति औंस तक जा सकती है, लेकिन यह केवल शॉर्ट-टर्म तेजी होगी। वित्त वर्ष 2027 तक कीमतें गिरकर 35-40 डॉलर प्रति औंस तक आ सकती हैं। यानी मौजूदा स्तर पर निवेशकों को भारी नुकसान का खतरा है।