नयी दिल्ली, पांच फरवरी (भाषा) देश के प्रमुख खाद्य तेल संगठन भारतीय सोयाबीन प्रसंस्करणकर्ता संघ (सोपा) ने वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल से जीन स्तर पर संवर्धित (जीएम) सोयाबीन डीओसी आयात करने की ‘पॉल्ट्री’ (मुर्गीपालन) उद्योग की मांगों को खारिज करने का आग्रह किया है। उनका यह तर्क है कि सोयाबीन डीओसी की घरेलू उपलब्धता पर्याप्त है और ऐसे आयात से लाखों किसानों को नुकसान होगा।
मंत्री को दिए गए एक ज्ञापन में सोपा ने कहा कि उच्च घरेलू कीमतों के आधार पर जीएम सोयाबीन डीओसी आयात के लिए पॉल्ट्री क्षेत्र की मांग बाजार की वास्तविकताओं को नजरअंदाज करती है और देश के कृषि क्षेत्र के लिए खतरा है।
सोपा ने कहा, ‘‘हम सरकार से इस अनुरोध को खारिज करने का पुरजोर आग्रह करते हैं। जब घरेलू आपूर्ति पर्याप्त हो तो आयात की अनुमति देना लाखों किसानों और हमारे कृषि क्षेत्र के दीर्घकालिक बुनियादी सिद्धांतों के लिए हानिकारक होगा।’’
सोपा ने कहा कि सोयाबीन डीओसी की कीमतें बाजार-संचालित हैं और प्रसंस्करणकर्ताओं द्वारा नियंत्रित नहीं हैं, जिसमें कच्चे माल की लागत उत्पादन खर्च का 96 प्रतिशत है। इसने कहा कि सोयाबीन डीओसी की लागत कच्चे सोयाबीन की कीमत और अंतरराष्ट्रीय सोयाबीन तेल की कीमतों से जुड़ी हुई है।
31 जनवरी तक, प्लांट डिलिवरी सोयाबीन की कीमतें 54,900 रुपये प्रति टन थीं, जिसमें प्रसंस्करण लागत 2,000 रुपये प्रति टन थी। 1,31,000 रुपये प्रति टन पर सोयाबीन तेल की प्राप्ति को ध्यान में रखने के बाद, 82 प्रतिशत प्राप्ति के आधार पर, परिणामी डीओसी की लागत 43,872 रुपये प्रति टन आई।
इंदौर बाजार में सोयाबीन की कीमतें 17 अप्रैल, 2025 को 46,000 रुपये प्रति टन से बढ़कर 31 जनवरी को 56,900 रुपये प्रति टन हो गईं।
भाषा राजेश राजेश अजय
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