श्रीलंका ने बिजली दरें बढ़ाईं, ऊर्जा बचत के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी

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श्रीलंका ने बिजली दरें बढ़ाईं, ऊर्जा बचत के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी

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  • Publish Date - March 31, 2026 / 12:47 PM IST,
    Updated On - March 31, 2026 / 12:47 PM IST

कोलंबो, 31 मार्च (भाषा) श्रीलंका ने एक अप्रैल से बिजली की कीमतें बढ़ाने का फैसला किया है। यह जानकारी देश के बिजली प्राधिकरण ने दी।

पब्लिक यूटिलिटीज कमीशन ऑफ श्रीलंका (पीयूसीएसएल) के चेयरमैन केपीएल चंद्रलाल ने सोमवार को कहा कि सार्वजनिक बिजली कंपनी सीलोन इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड (सीईबी) ने उपभोग की इकाइयों के आधार पर विभिन्न श्रेणियों में 13.5 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया था।

उन्होंने कहा, ‘‘ हालांकि सभी क्षेत्रों को होने वाली समस्याओं को ध्यान में रखते हुए घरेलू उपभोक्ताओं एवं उद्योगों के लिए बढ़ोतरी को केवल 8.5 प्रतिशत तक सीमित रखा गया है।’’

चेयरमैन चंद्रलाल ने बताया कि सीईबी द्वारा प्रस्तुत शुल्क संशोधन प्रस्ताव का पीयूसीएसएल ने विश्लेषण किया और जन परामर्श के बाद आयोग ने बिजली दरें बढ़ाने का निर्णय लिया।

इस बढ़ोतरी के तहत 180 यूनिट से अधिक बिजली खपत करने वाले उपभोक्ताओं को 25 प्रतिशत तक अधिक भुगतान करना होगा।

उन्होंने कहा कि यदि ईंधन की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि होती है और सीईबी की लागत 15 प्रतिशत से अधिक बढ़ जाती है तो कंपनी नया प्रस्ताव प्रस्तुत कर सकती है…‘‘ ऐसी स्थिति में हम उस प्रस्ताव पर विचार करने के लिए तैयार हैं। ’’

इस बीच, सरकारी क्षेत्र में ऊर्जा बचत के लिए आवश्यक सेवाओं के महानिदेशक ने सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

सभी सरकारी संस्थानों में अपराह्न तीन बजे तक ‘एयर कंडीशनर’ (एसी) बंद कर दिए जाएंगे। बिजली वाले विज्ञापन होर्डिंग रात आठ बजे तक बंद करने होंगे। सभी स्थानीय परिषदों को शाम छह बजे से रात 10 बजे के बीच सड़कों पर लगीं लाइट बंद करने के लिए कदम उठाने होंगे। 100 से अधिक लोगों वाले कार्यक्रमों के लिए राष्ट्रीय ग्रिड की बिजली का उपयोग नहीं किया जाएगा।

इस महीने की शुरुआत में पेट्रोल पंप पर लंबी कतारों के बाद ‘क्यूआर कोड’ आधारित ईंधन ‘राशनिंग’ प्रणाली लागू की गई थी।

सरकार ने कहा कि पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण आपूर्ति श्रृंखला में आई कठिनाइयों के बीच वह कच्चा तेल प्राप्त करने के लिए रूस के साथ काम कर रही है।

पर्यटन प्राधिकरण ने सोमवार को बताया कि 25 मार्च तक पर्यटकों के आगमन में सालाना 18 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है जो पश्चिम एशिया युद्ध का सीधा असर दिखाता है।

भाषा निहारिका मनीषा

मनीषा