‘डीपफेक’ पर कहीं ज्यादा कड़े नियमों की जरूरत, उद्योग जगत से बातचीत जारी: अश्विनी वैष्णव

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‘डीपफेक’ पर कहीं ज्यादा कड़े नियमों की जरूरत, उद्योग जगत से बातचीत जारी: अश्विनी वैष्णव

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  • Publish Date - February 17, 2026 / 02:46 PM IST,
    Updated On - February 17, 2026 / 02:46 PM IST

नयी दिल्ली, 17 फरवरी (भाषा) सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार को कहा कि ‘डीपफेक’ की समस्या तेजी से बढ़ रही है और बच्चों व समाज की सुरक्षा के लिए इससे निपटने के वास्ते कहीं अधिक कड़े नियमों की जरूरत है।

‘डीपफेक’, कृत्रिम मेधा (एआई) से तैयार की गई ऐसी तस्वीरें व वीडियो होती हैं जो नकली होने के बावजूद असली प्रतीत होती हैं।

उन्होंने बताया कि सरकार मौजूदा प्रावधानों से आगे अतिरिक्त सुरक्षा उपायों को लेकर उद्योग जगत से परामर्श शुरू कर चुकी है।

मंत्री ने कहा कि ‘डीपफेक’ और उम्र आधारित प्रतिबंधों से निपटने को लेकर सोशल मीडिया मंचों से बातचीत जारी है, ताकि इस मुद्दे पर सबसे उपयुक्त तरीके से निपटा जा सके।

मंत्री ने कहा कि कोई भी कंपनी चाहे वह नेटफ्लिक्स, यूट्यूब, मेटा या एक्स हो, सभी को देश के कानूनी ढांचे और संविधान का पालन करना होगा।

वैष्णव ने कहा कि ‘डीपफेक’ की समस्या दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है और इससे निपटने के लिए कड़े नियमन की जरूरत है।

उन्होंने कहा, ‘‘मेरा मानना है कि ‘डीपफेक’ पर कहीं ज्यादा कड़े नियम चाहिए। यह समस्या रोजाना बढ़ती जा रही है। बच्चों और समाज को इनसे होने वाले नुकसान से बचाना बेहद जरूरी है… हमें पहले से मौजूद नियमों के अतिरिक्त नियमन चाहिए, इस पर उद्योग जगत के साथ बातचीत शुरू की जा चुकी है।’’

उन्होंने बताया कि संसदीय समिति ने भी इस विषय पर गहराई से गौर किया है।

‘एआई इम्पैक्ट समिट’ से इतर संवाददाता सम्मेलन में मंत्री ने कहा, ‘‘ हमें ‘डीपफेक’ पर बेहद कड़े नियम बनाने होंगे और संसद के भीतर इस पर व्यापक सहमति बनानी होगी, ताकि समाज को इन खतरों से सुरक्षित रखा जा सके।’’

उन्होंने कहा कि इसके अलावा कई देशों ने उम्र आधारित प्रतिबंधों की आवश्यकता को स्वीकार किया है।

वैष्णव ने कहा, ‘‘ यह ऐसी बात है जिसे कई देशों ने माना है कि उम्र आधारित नियमन होना चाहिए। यह हमारे डेटा संरक्षण कानून का भी हिस्सा था… जब हमने छात्रों और युवाओं के लिए उपलब्ध सामग्री में उम्र के आधार पर अंतर तय किया था। उसी समय हमने यह दूरदर्शी कदम उठाया था।’’

केंद्रीय मंत्री ने साथ ही कहा कि ‘एआई इम्पैक्ट समिट’ में संप्रभु एआई मॉडल उपलब्ध कराए गए हैं और सरकार इन्हें व्यापक रूप से सभी के लिए उपलब्ध कराने को एक विशाल अवसंरचना तैयार करने की योजना बना रही है।

सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री ने कहा कि संप्रभु मॉडल वैश्विक स्तर के बड़े एआई मॉडल के सभी मानकों पर खरे उतरे हैं।

वैष्णव ने कहा, ‘‘ यहां संप्रभु मॉडल पेश किए गए हैं। आप जाकर देख सकते हैं कि वैश्विक मानकों पर वे कैसे खरे उतरते हैं। आने वाले समय में, एआई मिशन 2.0 के लिए संप्रभु मॉडल के लिए एक विशाल बुनियादी ढांचा तैयार करने की आवश्यकता होगी। इससे भारत की क्षमता एक नए स्तर पर पहुंच जाएगी।’’

गौरतलब है कि ओपनएआई के चैटजीपीटी, गूगल के जेमिनी आदि जैसी वैश्विक कंपनियों ने बड़े एआई मॉडल व्यावसायिक रूप से पेश किए हैं।

मंत्री ने साथ ही कहा कि निवेशक भी भारत को लेकर आशावादी हैं और उन्होंने 20,000 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश को अंतिम रूप दे दिया है जो अगले एक से दो वर्ष में किया जाएगा।

भाषा निहारिका अजय

अजय