भारत में चीनी खपत स्थिर, इसके इस्तेमाल को लेकर भ्रांतियों को दूर करने की जरूरत: सरकार

Ads

भारत में चीनी खपत स्थिर, इसके इस्तेमाल को लेकर भ्रांतियों को दूर करने की जरूरत: सरकार

  •  
  • Publish Date - October 28, 2020 / 03:36 PM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 07:55 PM IST

नयी दिल्ली, 28 अक्टूबर (भाषा) सरकार ने बुधवार को कहा कि भारत में चीनी के उपयोग को लेकर ‘भ्रांतियों और गलतफहमी’ को दूर करने की आवश्यकता है, क्योंकि पिछले तीन साल से देश में चीनी की प्रति व्यक्ति खपत 19 किलोग्राम पर स्थिर बनी हुई है।

खाद्य सचिव सुधांशु पांडे ने उद्योग संगठन भारतीय चीनी मिल संघ (इस्मा) के पोर्टल ‘एचटीटीपी://मीठा डाट आर्ग’ को जारी करने के बाद कहा कि भारत दुनिया में चीनी के सबसे बड़े उपभोक्ताओं में से एक है, लेकिन यहां प्रति व्यक्ति खपत 19 किलोग्राम पर स्थिर है, जो दुनिया की औसत प्रति व्यक्ति 23.50 किलो की खपत की तुलना में कम है।

देश की वार्षिक चीनी खपत 2.5- 2.6 करोड़ टन है, जबकि सितंबर में समाप्त 2019-20 सत्र में इसका उत्पादन 2.75 करोड़ टन तक पहुंच गया।

पांडे ने कहा, ‘‘बगैर किसी वैज्ञानिक आधार के चीनी और चीनी खपत के बारे में बहुत सारे मिथक चल रहे हैं। गलत जानकारी सच्चाई से कई गुना अधिक तेजी से फैलती है। इसलिए, वैज्ञानिक जानकारी सामने लाना बहुत महत्वपूर्ण है ताकि लोग सोचा समझा निर्णय ले सकें।’’

पांडे ने आगे कहा कि विदेशों में भी भारतीय चीनी के बारे में कई ‘गलतफहमियां’ हैं।

खाद्य सचिव ने कहा कि इस झूठ का सामना करने के लिए, इस्मा का ध्येय, अपने पोर्टल और सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को चीनी के बारे में सही और वैज्ञानिक जानकारी देना होना चाहिये।

उन्होंने इस्मा को बेहतर पहुंच कायम करने के लिए इस पोर्टल को क्षेत्रीय और विदेशी भाषाओं में शुरु करने का सुझाव दिया।

खाद्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव सुबोध कुमार सिंह ने कहा कि भारत में चीनी और चीनी उत्पादों के खिलाफ एक मुहिम सी चल पड़ी है कि ये हानिकारक हैं तथा मोटापे और मधुमेह का मुख्य कारण हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हम प्रमुख चीनी उत्पादक देश हैं और हमारे पास अधिशेष चीनी है। लेकिन हमारी प्रति व्यक्ति खपत कम है। इसकी वजह यह है कि धनी लोग जो अधिक खपत कर सकते हैं वह चीनी नहीं खाना चाहते हैं। कुछ है जो चीनी के खिलाफ जा रहा है। इस पोर्टल के जरिये हम लोगों को चीनी सेवन के अच्छे प्रभावों के बारे में जानकारी देंगे।’’

उदाहरण के लिए, इजरायल में, प्रति व्यक्ति चीनी की खपत 60 किलोग्राम है। उन्होंने कहा, ‘‘अगर चीनी हानिकारक है, तो यह सभी विकसित और अन्य देशों में हानिकारक होनी चाहिए जहां चीनी की खपत दुनिया के औसत से कहीं अधिक है।’’

इस्मा के अध्यक्ष विवेक एम पिट्टी ने कहा कि चीनी ‘गलतफहमी का शिकार’ हुई है और उन्होंने कहा कि एक दायरे में चीनी का सेवन करना स्वास्थ्य के लिए बुरा नहीं है।

भाषा राजेश राजेश महाबीर

महाबीर