केयर्न इंडिया पर जुर्माने का मामला उच्चतम न्यायालय ने सैट को वापस भेजा

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केयर्न इंडिया पर जुर्माने का मामला उच्चतम न्यायालय ने सैट को वापस भेजा

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  • Publish Date - September 9, 2026 / 06:59 PM IST,
    Updated On - September 9, 2026 / 06:59 PM IST

नयी दिल्ली, नौ सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को शेयरों की पुनर्खरीद को लेकर 2014 में की गई भ्रामक घोषणा के मामले में केयर्न इंडिया पर बाजार नियामक सेबी द्वारा लगाए गए 5.25 करोड़ रुपये के जुर्माने से जुड़ा मामला प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण (सैट) को वापस भेज दिया।

न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति के वी विश्वनाथन की पीठ ने कहा कि कारोबार संबंधी आंकड़ों में मौजूद विरोधाभासों की जांच करना और यह तय करना कि दोनों में से किस आंकड़े को स्वीकार किया जाए, सैट के अधिकार क्षेत्र में आता है।

पीठ ने कहा कि भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) की जांच रिपोर्ट और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के पत्र में दिए गए आंकड़ों में अंतर था, लेकिन सैट ने अपने आदेश में इस विसंगति पर विचार नहीं किया।

शीर्ष अदालत ने कहा, ‘‘यह ऐसी महत्वपूर्ण कमी है, जो मामले में निर्णय लेने वाले अधिकारी के आदेश के साक्ष्य संबंधी आधार से जुड़ी है। इसलिए मामले को सैट को वापस भेजा जाना उचित है, ताकि वह रिकॉर्ड की उचित जांच के बाद इस पहलू पर विचार कर सके।’’

पीठ ने सैट को निर्देश दिया कि वह पहले दोनों पक्षों द्वारा रखे गए कारोबार संबंधी आंकड़ों, जिनमें एनएसई की ओर से उपलब्ध कराए गए आंकड़े भी शामिल हैं, की उचित जांच करे और यह तय करे कि ऐतिहासिक कारोबार आंकड़ों का कौन-सा संस्करण विसंगतियों से मुक्त है तथा वास्तविक स्थिति को सही ढंग से दर्शाता है।

केयर्न इंडिया का वर्ष 2018 में वेदांता लिमिटेड में विलय हो गया था।

सेबी ने केयर्न इंडिया पर 2014 में शेयरों की पुनर्खरीद को लेकर भ्रामक घोषणा करने के मामले में 5.25 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था। नियामक ने कंपनी के तत्कालीन मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) एवं निदेशक पी. एलंगो, निदेशक अमन मेहता और निदेशक (जोखिम आश्वासन) एवं कंपनी सचिव नीरजा शर्मा पर भी 15-15 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था।

सेबी के मुताबिक, इन तीनों अधिकारियों ने जनवरी, 2014 में पुनर्खरीद संबंधी सार्वजनिक विज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे और कंपनी को भ्रामक घोषणा करने में मदद की थी।

नियामक ने विस्तृत जांच के बाद कहा था कि एनएसई में पर्याप्त बिक्री आदेश उपलब्ध होने के बावजूद केयर्न इंडिया ने पर्याप्त खरीद आदेश नहीं दिए। इस वजह से कंपनी पुनर्खरीद के लिए निर्धारित न्यूनतम 50 प्रतिशत राशि का इस्तेमाल भी नहीं कर सकी।

केयर्न इंडिया ने 14 जनवरी, 2014 को खुले बाजार से 17,08,95,522 शेयरों की पुनर्खरीद की घोषणा की थी। प्रत्येक शेयर के लिए अधिकतम 335 रुपये की कीमत तय की गई थी और पूरी पुनर्खरीद का आकार 5,725 करोड़ रुपये था।

पुनर्खरीद की अवधि 23 जनवरी से 22 जुलाई, 2014 तक तय की गई थी। कंपनी ने 27 जून, 2014 तक 3,67,03,839 शेयरों की पुनर्खरीद की थी, जो अधिकतम प्रस्तावित शेयरों का 21.48 प्रतिशत था। इस पर उसने 1,225.45 करोड़ रुपये खर्च किए थे।

भाषा प्रेम प्रेम अजय

अजय