स्विगी के निदेशक मंडल ने विदेशी स्वामित्व की सीमा 49.5 प्रतिशत तय की
स्विगी के निदेशक मंडल ने विदेशी स्वामित्व की सीमा 49.5 प्रतिशत तय की
नयी दिल्ली, 23 जुलाई (भाषा) ऑनलाइन ऑर्डर पर खाने-पीने के सामान की आपूर्ति करने वाले मंच स्विगी के निदेशक मंडल ने कंपनी में विदेशी स्वामित्व को कुल मिलाकर 49.5 प्रतिशत तक सीमित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
कंपनी ने यह कदम खुद को भारतीय स्वामित्व और नियंत्रण वाली कंपनी (आईओसीसी) के रूप में पात्र बनाने के प्रयास के तहत उठाया है।
कंपनी ने शेयर बाजार को दी सूचना में कहा कि इस प्रस्ताव को मंजूरी के लिए 18 अगस्त को होने वाली स्विगी की 13वीं वार्षिक आम बैठक (एजीएम) में शेयरधारकों के समक्ष विशेष प्रस्ताव के रूप में रखा जाएगा।
आईओसीसी का दर्जा मिलने से स्विगी को अपने त्वरित वाणिज्य ब्रांड ‘इंस्टामार्ट’ के तहत सीधे माल का स्वामित्व रखने और उसे बेचने की अनुमति मिल सकेगी। इससे कंपनी के मार्जिन में सुधार और आपूर्ति श्रृंखला पर बेहतर नियंत्रण मिलने की उम्मीद है।
कंपनी ने आईओसीसी का दर्जा हासिल करने के लिए पहले भी प्रयास किए हैं। मई में स्विगी अपने संचालन के नियमों (एओए) में बदलाव के लिए जरूरी शेयरधारकों की मंजूरी हासिल नहीं कर पाई थी। इन बदलावों के जरिये कंपनी आईओसीसी का दर्जा प्राप्त करना चाहती थी।
स्विगी के निदेशक मंडल ने विदेशी स्वामित्व सीमा के प्रस्ताव के अलावा भारत के विदेशी मुद्रा प्रबंधन कानून (फेमा) के अनुरूप एओए में बदलाव को भी मंजूरी दी है। साथ ही अधिकृत वरीयता शेयर पूंजी को अधिकृत इक्विटी शेयर पूंजी में बदलने का प्रस्ताव भी मंजूर किया गया है, जिसे शेयरधारकों की मंजूरी की जरूरत होगी।
नियामकीय सूचना में कहा गया, ‘लागू विदेशी मुद्रा कानूनों के तहत भारतीय स्वामित्व और नियंत्रण वाली कंपनी (आईओसीसी) के रूप में पात्र बनने के व्यापक प्रयास के तहत कंपनी अपने एओए में संशोधन का प्रस्ताव रखती है।’
कंपनी ने बताया कि प्रस्तावित बदलावों में कुछ मौजूदा व्यक्तिगत और संस्थागत नामांकन अधिकारों को हटाना, कुछ निर्दिष्ट निवासी व्यक्तियों के नामांकन अधिकारों में संशोधन और उन्हें शामिल करना तथा इन अधिकारों के इस्तेमाल और समाप्ति से जुड़ी शर्तों को स्पष्ट करना शामिल है।
भाषा योगेश अजय
अजय

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