मुंबई, 16 अप्रैल (भाषा) अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले रुपया बृहस्पतिवार को 19 पैसे मजबूत होकर 93.14 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीदों के बीच वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमत में गिरावट के चलते रुपये में मजबूती आई।
विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने कहा कि आयातकों की डॉलर मांग बढ़ने और विदेशी पूंजी की निरंतर निकासी ने स्थानीय मुद्रा की बढ़त पर अंकुश लगाया। कच्चे तेल की कीमतें 95 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहने से घरेलू मुद्रा में तेजी आई।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 93.29 पर खुला और कारोबार के दौरान डॉलर के मुकाबले 93.10 के ऊपरी और 93.35 के निचले स्तर तक गया। कारोबार के अंत में यह 93.14 पर बंद हुआ, जो पिछले बंद भाव से 19 पैसे की बढ़त है।
रुपया बुधवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले दो पैसे बढ़कर 93.33 पर बंद हुआ था।
एलकेपी सिक्योरिटीज के उपाध्यक्ष शोध विश्लेषक (जिंस एवं मुद्रा) जतिन त्रिवेदी ने कहा कि मुख्य रूप से अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के कारण रुपये में तेजी आई। इस वजह से पिछले 48 घंटों में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई है और इससे भारत के आयात बिल पर दबाव कम हुआ है।
त्रिवेदी ने कहा, ‘‘हालांकि, यह सुधार नाजुक बना हुआ है, क्योंकि बाजार की वैश्विक घटनाक्रमों पर नजर है और कच्चे तेल की कीमतों में किसी भी तरह की तेजी का असर रुपये पर तुरंत पड़ सकता है। रुपये के 92.75 से 93.75 के बीच रहने का अनुमान है।’’
इस बीच, दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.18 प्रतिशत बढ़कर 98.03 पर पहुंच गया।
वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड वायदा कारोबार में 1.65 प्रतिशत बढ़कर 96.50 डॉलर प्रति बैरल पर रहा। पश्चिम एशिया में संकट जल्द खत्म होने की उम्मीदों के बीच कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गईं।
तीस शेयरों पर आधारित बंबई शेयर सूचकांक 122.56 अंक यानी 0.16 प्रतिशत की गिरावट के साथ 77,988.68 अंक पर बंद हुआ जबकि निफ्टी 34.55 अंक यानी 0.14 प्रतिशत की गिरावट के साथ 24,196.75 अंक पर रहा।
शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशक बाजार में शुद्ध लिवाल रहे। उन्होंने बृहस्पतिवार को 382.36 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।
भाषा राजेश राजेश रमण
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